राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के रावतसर उपखण्ड में अब शिक्षकों की भूमिका ब्लैकबोर्ड से बदलकर रसोई गैस के सिलेंडरों तक सिमटती नजर आ रही है। देशभर में एलपीजी गैस की सप्लाई चेन में आई बाधाओं और भविष्य में होने वाली संभावित किल्लत को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने शिक्षा जगत में नई चर्चा छेड़ दी है। उपखण्ड अधिकारी एवं उपखण्ड मजिस्ट्रेट ने तहसील कार्यालय में एक विशेष 'कंट्रोल रूम स्थापित किया है, जिसकी पूरी बागडोर तीन शिक्षकों के कंधों पर डाल दी गई है। यह आदेश 14 मार्च 2026 से प्रभावी हो गया है, जिसके तहत अब ये शिक्षक 24 घंटे गैस आपूर्ति की निगरानी और आमजन की शिकायतों का निस्तारण करेंगे।


प्रशासनिक आदेश के मुताबिक, गैस आपूर्ति की इस विशेष ड्यूटी को तीन पारियों में बांटा गया है ताकि कंट्रोल रूम बिना रुके चलता रहे। सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक की पहली पारी में अध्यापक राधेश्याम तैनात रहेंगे। इसके तुरंत बाद दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक की जिम्मेदारी अध्यापक विक्रम सिंह बिजारणीया को सौंपी गई है। वहीं, रात के सन्नाटे में गैस संकट पर नजर रखने के लिए रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक की तीसरी पारी में शिक्षक कैलाश शर्मा की ड्यूटी लगाई गई है। ये तीनों शिक्षक अब अपने स्कूल जाने के बजाय तहसील कार्यालय के दूरभाष नंबर 01537-250123 पर आने वाली शिकायतों और सूचनाओं का रिकॉर्ड रखेंगे।


इस पूरी व्यवस्था की कमान तहसीलदार श्रीमती पायल अग्रवाल को सौंपी गई है, जो इस कंट्रोल रूम की प्रभारी नियुक्त की गई हैं। उनकी देखरेख में ही गैस आपूर्ति से जुड़ी पल-पल की सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाएगा। उपखण्ड अधिकारी द्वारा जारी इस आदेश का मुख्य उद्देश्य भले ही गैस आपूर्ति में आ रहे व्यवधान के कारण जनता को होने वाली परेशानियों को कम करना और शिकायतों का मौके पर ही समाधान करना बताया गया हो, लेकिन शिक्षकों को इस गैर-शैक्षणिक कार्य में झोंकने से शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक एलपीजी की स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक इन शिक्षकों की रोटेशन ड्यूटी इसी प्रकार जारी रहेगी।