भोपाल। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार द्वारा तैयार किए गए 'मप्र सिविल सेवा नियम-2026' के नए संशोधित प्रारूप में सरकारी कर्मचारियों के नैतिक आचरण और अनुशासन को लेकर एक बेहद सख्त कदम उठाया गया है। नए नियमों के लागू होने के बाद अब सेवाकाल के दौरान किसी भी प्रकार के गंभीर श्रेणी के अपराध में लिप्त पाए जाने वाले शासकीय सेवकों को सीधे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। सरकार के इस कड़े रुख से साफ है कि प्रशासनिक व्यवस्था में दागी और आपराधिक छवि वाले कर्मचारियों के लिए अब कोई जगह नहीं होगी। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इस नए ड्राफ्ट को सार्वजनिक कर दिया गया है, जिस पर 15 जून 2026 तक सेवा नियमों से जुड़े लोग और आम नागरिक अपने सुझाव व आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।


अगर पुराने सेवा नियमों की बात करें, तो अभी तक केवल महिलाओं के विरुद्ध गंभीर अपराध (महिला अपराध) करने वाले शासकीय सेवकों को ही नौकरी से बर्खास्त करने या सेवा से बाहर करने का कड़ा नियम प्रचलन में था। लेकिन बदलते सामाजिक परिवेश और प्रशासनिक शुचिता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अब इसका दायरा काफी बढ़ा दिया है। नए सिविल सेवा नियमों में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के साथ-साथ अन्य सभी प्रकार के गंभीर आपराधिक मामलों को भी जोड़ दिया गया है, ताकि जनता के बीच शासकीय सेवकों की छवि और अधिक साफ-सुथरी और भरोसेमंद बनाई जा सके।


सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया के अनुसार, इस नए प्रारूप को विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। शासकीय सेवक, उनके परिवार के सदस्य, विभिन्न कर्मचारी संगठन या अन्य कोई भी नागरिक 15 जून 2026 से पहले इस पर अपने तथ्यात्मक सुझाव या दावे-आपत्तियां ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं। इस अंतिम तिथि के बाद मिलने वाले किसी भी विचार या आपत्ति को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके बाद सभी प्राप्त महत्वपूर्ण सुझावों की समीक्षा कर इस नए और सख्त नियम को पूरे प्रदेश में पूरी तरह से प्रभावी कर दिया जाएगा।