Tuesday, February 10, 2026

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देशनई दिल्लीप्रवासी मजदूर सूरज पर हमले के मामले में एनएचआरसी ने तमिलनाडु सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया

प्रवासी मजदूर सूरज पर हमले के मामले में एनएचआरसी ने तमिलनाडु सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया

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10 फ़रवरी 2026, 07:10 am IST
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नई दिल्ली। तमिलनाडु के तिरुत्तणी में ओडिशा के एक प्रवासी मजदूर पर हुए बर्बर हमले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी ) ने राज्य सरकार की प्रतिक्रिया पर नाराजगी जताई है। आयोग ने एफआईआर दर्ज करने में देरी और घायल युवक के अस्पताल से रहस्यमय तरीके से गायब हो जाने को गंभीर लापरवाही बताते हुए तमिलनाडु सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।



यह घटना दिसंबर 2025 में तिरुवल्लूर जिले के तिरुत्तणी रेलवे स्टेशन के पास हुई थी। जानकारी के अनुसार, चार 17 वर्षीय नशे के आदी लड़कों ने एक ओडिया युवक पर धारदार हथियार (हंसिया) से हमला किया। इस हमले में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में उसकी पहचान ओडिशा के रहने वाले 20 वर्षीय के. सूरज के रूप में हुई।



घटना के बाद सूरज को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका बयान उसी दिन, यानी 27 दिसंबर 2025 को दर्ज कर लिया गया था। इसके बावजूद पुलिस ने एफआईआर अगले दिन 28 दिसंबर को दर्ज की। एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा कि एफआईआर सोशल मीडिया के दबाव में दर्ज की गई, जो कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।



सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि गंभीर रूप से घायल सूरज इलाज के दौरान अस्पताल से निकल गया और उसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल पाया। तमिलनाडु सरकार ने आयोग को दिए जवाब में कहा कि पीड़ित घायल अवस्था में अस्पताल छोड़कर चला गया और अब सरकार के पास उसकी कोई जानकारी नहीं है।



इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस पूरे मामले को सरकारी निकृष्टता की पराकाष्ठा बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि राज्य सरकार न तो पीड़ित को ढूंढ पाई और न ही उसके परिवार तक पहुंचने का कोई प्रयास किया गया।



कानूनगो ने कहा कि घायल के अचानक गायब हो जाने के बाद भी प्रशासन ने उसे खोजने की कोई गंभीर कोशिश नहीं की, जो बेहद चिंताजनक है। इसी को ध्यान में रखते हुए एनएचआरसी ने तमिलनाडु के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि पीड़ित को खोजकर उसका इलाज सुनिश्चित किया जाए, यह स्पष्ट किया जाए कि उसे 2 लाख रुपए का मुआवजा क्यों न दिया जाए, और पुलिस एवं प्रशासन की लापरवाही पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है, इसका पूरा विवरण दिया जाए।



एनएचआरसी का कहना है कि यह मामला सिर्फ अपराध का नहीं, बल्कि मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का है। आयोग ने साफ संकेत दिया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो आगे सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

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