भोपाल, जीतेन्द्र यादव। देश में नई शिक्षा नीति-2020 के लागू होने का छठवां वर्ष चल रहा है। आगामी जुलाई माह में नई शिक्षा नीति के विभिन्न प्रावधानों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, जिससे विकसित भारत के निर्माण की मजबूत पृष्ठभूमि तैयार हो सके। नई शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक रटने वाली शिक्षा (रोट लर्निंग) से आगे बढ़ाकर क्रिटिकल थिंकिंग, नवाचार और रचनात्मकता की ओर प्रेरित करना है।
नई शिक्षा नीति में ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो भारत की आवश्यकताओं के साथ-साथ वैश्विक जरूरतों को भी पूरा करने में सक्षम हैं। विद्यार्थियों में स्वतंत्र सोच विकसित करने, समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता बढ़ाने तथा नए सृजन के प्रति रुचि उत्पन्न करने पर विशेष बल दिया गया है। इससे युवा पीढ़ी भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक सक्षम बन सकेगी।
मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत प्रारंभिक शिक्षा को मातृभाषा में उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया है। कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों को मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था की गई है, जिससे बच्चों की विषयों पर पकड़ मजबूत होगी और उनकी समझ में वृद्धि होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि मातृभाषा में शिक्षा मिलने से विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता बढ़ती है तथा उनमें नवाचार और रचनात्मक सोच का विकास होता है।
नई शिक्षा नीति में कौशल विकास, व्यावहारिक शिक्षा, तकनीकी दक्षता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप अध्ययन व्यवस्था को भी महत्व दिया गया है। शिक्षा को अधिक समावेशी, आधुनिक और भविष्य उन्मुख बनाने के लिए कई सुधारवादी कदम उठाए गए हैं। इन बदलावों के सकारात्मक परिणाम धीरे-धीरे सामने आने लगे हैं और देश की शिक्षा व्यवस्था 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को केवल परीक्षा केंद्रित शिक्षा तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर, रचनात्मक और नवाचार आधारित सोच वाला नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यही प्रयास विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक मजबूत आधार सिद्ध होगा।




