इंदौर। सियासत के गलियारों में गुरुवार को उस समय एक अजीबोगरीब और असहज स्थिति निर्मित हो गई, जब कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व सांसद और वर्तमान आलोट विधायक चिंतामणि मालवीय को पहचानने में चूक कर गए। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान घटित हुआ यह वाकया सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। मंत्री सिलावट का बार-बार बदलता रुख और विधायक को 'कांग्रेस का नेता' समझ लेना मंच पर मौजूद भाजपा पदाधिकारियों के लिए भी भारी असमंजस का कारण बन गया।
सवाल यौन शोषण का, जवाब में 'कांग्रेस' का नाम
दरअसल, पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब पत्रकारों ने कांग्रेस नेता रीना बोरासी द्वारा भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय पर लगाए गए यौन शोषण और संपत्ति कब्जे के आरोपों पर मंत्री सिलावट की प्रतिक्रिया जाननी चाही। सवाल सुनते ही मंत्री ने त्वरित जवाब देते हुए इसे 'कांग्रेस का अंदरूनी मामला' बता दिया। उनके इस जवाब से मंच पर सन्नाटा पसर गया, क्योंकि जिस नेता पर आरोप लगे थे, वे भाजपा के ही निर्वाचित विधायक हैं। मंत्री का यह बेतुका तर्क सुनकर वहां मौजूद मीडियाकर्मी और भाजपा नेता, दोनों ही चौंक उठे।
जब जिलाध्यक्ष को याद दिलाना पड़ा—'मालवीय जी अपने विधायक हैं'
मंत्री सिलावट के भ्रम को दूर करने के लिए मंच पर मौजूद भाजपा जिलाध्यक्ष श्रवण चावड़ा को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने मंत्री को धीरे से याद दिलाया कि "मालवीय जी अपने विधायक हैं आलोट से।" इसके बावजूद मंत्री सिलावट का असमंजस खत्म नहीं हुआ और उन्होंने पलटकर पूछ लिया— "चिंतामणि अपना? किसने कहा?" जब पत्रकारों ने जोर देकर बताया कि वे भाजपा के पूर्व सांसद और वर्तमान विधायक हैं, तब जाकर मंत्री को स्थिति समझ आई, लेकिन तब तक वे एक और विवादास्पद बयान दे चुके थे।
"आरोप सही होंगे तभी लगाए गए होंगे"—मंत्री के बयान से मची हलचल
विधायक की पहचान स्पष्ट होने के बाद मंत्री सिलावट ने एक ऐसा बयान दे दिया जिससे पार्टी की किरकिरी और बढ़ गई। उन्होंने कहा, "अगर आरोप सही होते, तभी तो लगाए जाते। इसकी पूरी निष्पक्षता से जांच की जाएगी और कुछ गलत मिला तो कार्रवाई होगी।" अपनी ही पार्टी के विधायक के खिलाफ 'आरोप सही होने' की संभावना जताते ही पत्रकारों ने जब उनसे तीखे सवाल किए, तो मंत्री को अपनी गलती का अहसास हुआ। इसके कुछ ही पलों बाद वे पूरी तरह अपने बयान से पलट गए और आरोपों को 'बेबुनियाद' करार देने लगे।
पल-पल बदलती रही मंत्री की सफाई
प्रेस कॉन्फ्रेंस के आखिरी दौर तक मंत्री सिलावट का रुख पूरी तरह बदल चुका था। जब उन्हें बताया गया कि विधायक मालवीय ने इन आरोपों के खिलाफ 10 करोड़ रुपये की मानहानि का नोटिस भेजा है, तो मंत्री ने पत्रकारों को ही नसीहत दे डाली। उन्होंने कहा, "आप गलत तरीके से पूछ रहे हो, प्रस्तुतीकरण ठीक करो। जो आरोप लगाए गए हैं, वे पूरी तरह बेबुनियाद हैं।" मंत्री के इस यू-टर्न और असमंजस भरी बातचीत ने यह साफ कर दिया कि वे विषय की पूरी जानकारी के बिना ही मीडिया से मुखातिब हो रहे थे।
क्या है मूल विवाद?
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद कांग्रेस नेता रीना बोरासी के उन गंभीर आरोपों के बाद शुरू हुआ है, जिसमें उन्होंने विधायक चिंतामणि मालवीय पर एक महिला के शोषण का आरोप लगाया था। इसके जवाब में मालवीय ने कड़ा रुख अपनाते हुए बोरासी को कानूनी नोटिस थमाया है और सात दिनों के भीतर सबूत पेश करने की चुनौती दी है। हालांकि, इस पूरे मामले में मंत्री तुलसी सिलावट की 'जुबान फिसलने' और पहचान की चूक ने विपक्ष को बैठे-बिठाए सरकार को घेरने का एक बड़ा मुद्दा थमा दिया है।



