मंदसौर के आश्रय गृह ने सालों बाद टूटे परिवार को फिर से जोड़ा

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मंदसौर,ललितशंकर धाकड़। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में संचालित अनामिका जन कल्याण सेवा समिति विक्षिप्त महिला आश्रय गृह ने एक बार फिर एक टूटे हुए परिवार को एकजुट करने का कमाल दिखाया है। फरवरी 2025 में ट्रेन की पटरी पर भटकती हुई 19 वर्षीय लाईबा को GRP पुलिस ने पाया था। मानसिक रूप से विक्षिप्त अवस्था में मिली इस युवती को पुलिस ने आश्रय गृह की संचालिका समाजसेवी अनामिका जैन के पास पहुंचाया।
अनामिका जैन और उनकी टीम ने लाईबा की देखभाल, उचित इलाज और काउंसलिंग की। धीरे-धीरे लाईबा ने सुधार दिखाया और अपने शब्दों में उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कैराना गांव स्थित घर का पता बताया। संस्था ने तुरंत शामली पुलिस से संपर्क किया और लाईबा के परिवार तक पहुंचने का प्रयास किया।
लाइबा का परिवार बेहद गरीब हालत में था। पिता का देहांत हो चुका था, मां बीमार रहती हैं और भाई शाहीद खुद लाईबा को ढूंढते-ढूंढते एक दुर्घटना का शिकार हो गया था। जब पुलिस ने शाहीद को बताया कि उसकी बहन मंदसौर में सुरक्षित है, तो उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। आश्रय गृह की मदद से फोन पर बहन से बात करने के बाद शाहीद ने जल्द मंदसौर पहुंचने का फैसला किया।
शुक्रवार को शाहीद मंदसौर पहुंचा। जब सालों बाद बहन-भाई ने एक-दूसरे को देखा, तो खुशी के आंसू बह निकले। संस्था के सदस्य भी इस भावुक पल को देखकर भाव-विभोर हो गए। शाहीद ने बताया कि लाईबा की मानसिक स्थिति बिगड़ने पर परिवार ने उसे लोहे की सांकल से बांधकर रखा था, लेकिन एक दिन वह घर से भाग गई और ट्रेन में बैठकर दूर मंदसौर तक पहुंच गई।
सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शाहीद अपनी बहन लाईबा को लेकर उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हो गया। दोनों ने अनामिका जैन और उनकी पूरी टीम को दिल से धन्यवाद दिया।
बता दें कि अनामिका जन कल्याण सेवा समिति विक्षिप्त महिला आश्रय गृह सड़क पर लावारिस घूमने वाली विक्षिप्त महिलाओं को आश्रय देती है और उनका पुनर्वास करवाती है। संस्था अब तक 52 से अधिक महिलाओं और युवतियों का सफल पुनर्वास कर चुकी है, जिससे कई टूटे परिवार फिर से जुड़ सके हैं।
