बीजिंग। 20 अक्टूबर को चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने दुशांबे में शांगहाई सहयोग संगठन (एससीओ) सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों (प्रधानमंत्रियों) की परिषद की 25वीं बैठक में भाग लिया। इस बैठक की अध्यक्षता ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री कोहिर रसूलजोदा ने की। बैठक में एससीओ सदस्य देशों के नेताओं और प्रतिनिधियों, मेजबान देश के अतिथियों और संबंधित अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों ने भाग लिया।ली छ्यांग ने कहा कि इस वर्ष एससीओ की 25वीं वर्षगांठ है। सितंबर में आयोजित बिश्केक शिखर सम्मेलन ने कई महत्वपूर्ण परिणाम हासिल किए, जिससे शांति और विकास को बढ़ावा देने में नई गति मिली। साथ ही, विश्व में अस्थिरता और अनिश्चितता बढ़ रही है।

शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने इस बात पर जोर दिया कि मानव जाति के भविष्य और भाग्य से संबंधित एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े होकर, एससीओ को साहसपूर्वक अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारियों को निभाना चाहिए और इतिहास की दिशा तय करने के लिए पहल करनी चाहिए। इसके लिए हमें दृष्टिकोण, अवधारणाओं और सोच के स्तर पर बेहतर सहमति बनाने और संचालन और कार्यान्वयन के स्तर पर बेहतर कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

उपस्थित सभी पक्षों ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में एससीओ अधिक मजबूत और प्रभावशाली हो गया है। सभी पक्षों को थ्येनचिन शिखर सम्मेलन और बिश्केक शिखर सम्मेलन के परिणामों को सक्रिय रूप से लागू करना चाहिए, "शांगहाई भावना" को और बढ़ावा देना चाहिए, संचार और सहयोग को मजबूत करना चाहिए, एससीओ के उच्च गुणवत्ता वाले विकास को बढ़ावा देना चाहिए और क्षेत्रीय और विश्व शांति और विकास में अधिक योगदान देना चाहिए।

बैठक के बाद, ली छ्यांग ने सदस्य देशों के नेताओं के साथ मिलकर एक संयुक्त विज्ञप्ति पर हस्ताक्षर किए, जिसमें व्यापार और निवेश, उद्योग और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग दस्तावेजों के साथ-साथ एससीओ के निर्माण से संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

(साभार - चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)