मुंबई/नई दिल्ली, 12 जून । प्राचीन भारत के महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट को लेकर बनाए गए एक विज्ञापन को लेकर अमेजन इंडिया विवादों में घिर गई है। हिंदू जनजागृति समिति ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने अपने एक विज्ञापन में आर्यभट्ट का अनुचित और अपमानजनक चित्रण किया है। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में कार्यरत अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने अमेजन इंडिया को कानूनी नोटिस भेजा है।
नोटिस में कंपनी से मांग की गई है कि वह 48 घंटे के भीतर जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और संबंधित विज्ञापन को सभी प्लेटफॉर्म से हटा लें। नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि निर्धारित समय के भीतर कार्रवाई नहीं की गई तो कंपनी के खिलाफ दीवानी और आपराधिक कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
विवाद अमेजन की ‘अमेजन नाऊ’ सेवा के प्रचार अभियान से जुड़ा है। हिंदू जनजागृति समिति का आरोप है कि इस विज्ञापन में आर्यभट्ट की वेशभूषा में एक व्यक्ति को हास्य और व्यंग्य के अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। समिति का कहना है कि आर्यभट्ट केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, विज्ञान और गणित की महान परंपरा के प्रतीक हैं। ऐसे में उनका उपयोग व्यावसायिक प्रचार के लिए इस प्रकार करना भारतीय सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय सम्मान के खिलाफ है।
नोटिस में कहा गया है कि आर्यभट्ट ने गणित और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। विशेष रूप से ‘शून्य’ की अवधारणा को विश्व स्तर पर स्थापित करने में उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। ऐसे महान विद्वान के चित्रण को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर भी इस विज्ञापन का विरोध हो रहा है और कई लोगों ने अमेजन के खिलाफ अभियान शुरू किया है।
हिंदू जनजागृति समिति ने यह भी आरोप लगाया है कि इससे पहले भी अमेजन पर हिंदू धार्मिक प्रतीकों और सांस्कृतिक भावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता के आरोप लग चुके हैं। समिति का कहना है कि कंपनी को भारतीय संस्कृति और महापुरुषों के सम्मान का ध्यान रखना चाहिए।
नोटिस के अनुसार अमेजन को संबंधित विज्ञापन को यूट्यूब, इंस्टाग्राम, एक्स (पूर्व में ट्विटर), टेलीविजन और अन्य सभी डिजिटल माध्यमों से हटाना होगा। इसके अलावा कंपनी से अपने आधिकारिक मंचों और प्रमुख समाचार पत्रों के माध्यम से बिना शर्त सार्वजनिक माफी जारी करने की भी मांग की गई है। अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने कहा है कि यदि समय सीमा के भीतर उचित कदम नहीं उठाए गए तो मामले को अदालत में ले जाया जाएगा।

