श्रीनगर। यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर जम्मू-कश्मीर के कारोबारियों की चिंता सामने आई है। श्रीनगर में व्यापारी बशीर अहमद और ट्रेडर आसिफ अहमद ने कहा कि यूपीआई लेनदेन पर किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क छोटे व्यापारियों और रिटेल कारोबारियों के लिए चुनौती पैदा कर सकता है। उन्होंने सरकार से प्रस्ताव पर दोबारा विचार करने की मांग की।बशीर अहमद ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के उस कथित बयान पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि यूपीआई से आम आदमी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि छोटे दुकानदार और ट्रेडर भी आम आदमी का हिस्सा हैं और उनके कारोबार पर पड़ने वाला असर अंततः ग्राहकों तक पहुंच सकता है।

उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारियों को पहले से ही कई तरह के आर्थिक दबावों का सामना करना पड़ता है। बिजली बिल, ब्याज और कारोबार से जुड़े अन्य खर्चों के बीच व्यापारी डिजिटल भुगतान की सुविधा का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त लागत आने की स्थिति में उनके लिए कारोबार चलाना मुश्किल हो सकता है।

उन्होंने आशंका जताई कि यदि व्यापारियों को यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा तो कुछ दुकानदार नकद लेनदेन की ओर लौट सकते हैं। इससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की कोशिशों को झटका लग सकता है और ग्राहकों के लिए भी परेशानी बढ़ सकती है।

बशीर अहमद ने जम्मू-कश्मीर के कारोबारियों के पिछले वर्षों के अनुभवों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि घाटी के व्यापारियों को विभिन्न परिस्थितियों में लंबे समय तक कारोबार बंद रखने की स्थिति का सामना करना पड़ा है। बाढ़, विरोध-प्रदर्शन, कोविड-19 महामारी और अन्य घटनाओं के कारण व्यापार प्रभावित हुआ। ऐसे माहौल में व्यापारियों पर नया आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं होगा। उन्होंने केंद्र सरकार से भी इस मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर के व्यापारियों की स्थिति को ध्यान में रखने की अपील की।

वहीं, ट्रेडर आसिफ अहमद ने कहा कि यूपीआई से जुड़े प्रस्ताव का कारोबार पर असर पड़ सकता है। यूपीआई वर्तमान समय में पैसे के लेनदेन का एक सुविधाजनक माध्यम है। साथ ही, व्यापारी और ग्राहक दोनों इसका इस्तेमाल करते हैं। यदि यूपीआई लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लागू होता है तो कुछ व्यापारी और ग्राहक दूसरे भुगतान माध्यमों या एप्लिकेशन की ओर जा सकते हैं। इससे डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।

उन्होंने पेट्रोल पंप कारोबारियों की ओर से जताई गई चिंताओं का भी हवाला दिया और कहा कि यदि इस तरह की व्यवस्था लागू होती है तो कई लोगों को डिजिटल भुगतान करने में परेशानी हो सकती है। आसिफ अहमद ने केंद्र सरकार से प्रस्ताव की समीक्षा करने की मांग करते हुए कहा कि यूपीआई को सुविधाजनक और व्यापक डिजिटल भुगतान माध्यम के रूप में बनाए रखना जरूरी है।