नई दिल्ली। भारत की बैडमिंटन खिलाड़ी गायत्री गोपीचंद ने बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में अपने सफर को शानदार बताया। उन्होंने त्रिशा जॉली संग मिलकर घरेलू सरजमीं पर हुए इस टूर्नामेंट में देश को एकमात्र मेडल दिलाया। इस उपलब्धि से जुड़ी भावनाओं से अभिभूत गायत्री ने कहा कि यह उनके लिए बहुत खास पल था।त्रिशा और गायत्री की जोड़ी को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, वह ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रहीं। इस भारतीय जोड़ी का शानदार सफर तब खत्म हुआ जब मौजूदा चैंपियन चीन की लियू शेंग शू और टैन निंग ने वापसी करते हुए उन्हें सेमीफाइनल में 18-21, 21-13, 21-8 से हराया।
हार के बावजूद, त्रिशा और गायत्री ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत के लिए 15 साल बाद महिला डबल्स का पहला मेडल जीता। इससे पहले 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। गायत्री ने 'आईएएनएस' से कहा, "मुझे लगता है कि यह शानदार रहा है। मुझे लगता है कि यह एक अद्भुत सफर रहा है।" यह भारतीय जोड़ी चोटों के कारण बिना ज्यादा लय के टूर्नामेंट में उतरी थी। त्रिशा को इस साल की शुरुआत में टखने में चोट लगी थी, जिससे वह तीन महीने तक कोर्ट से दूर रही थीं। हालांकि, फिलीपींस चैलेंज में उनके प्रदर्शन ने उन्हें यह भरोसा दिलाया कि वे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों का मुकाबला कर सकती हैं।
गायत्री ने कहा, "मुझे लगता है कि इस टूर्नामेंट में आते समय हम बस खुद पर भरोसा करना चाहते थे और मुझे लगता है कि फिलीपींस चैलेंज के बाद हमारे अंदर वह लय आ गई थी। इस वजह से उस टूर्नामेंट में जिस तरह से हमने खेला, उसके बाद हम काफी आत्मविश्वास से भरे हुए थे, क्योंकि हमने वहां कुछ अच्छी जोड़ियों को हराया था। इस टूर्नामेंट में आते समय हमें भरोसा था कि हम इस स्तर पर खेल सकते हैं।"
इसके बाद त्रिशा और गायत्री ने शुरुआती राउंड में स्पेन और अमेरिका की जोड़ियों को हराकर अपना आत्मविश्वास बनाए रखा। फिर क्वार्टर फाइनल में उन्होंने टूर्नामेंट का एक बड़ा उलटफेर करते हुए चीन की चौथी वरीयता प्राप्त जिया यी फैन और झांग शू जियान को चौंका दिया और अपना मेडल पक्का कर लिया।
गायत्री ने कहा, "शुरुआती कुछ राउंड में भी मुझे लगता है कि हमने स्पेन और अमेरिका के खिलाफ खेला और वे सभी इस स्तर पर, यानी सबसे ऊंचे स्तर पर बहुत अच्छा खेल रही थीं। इसी कारण उन जोड़ियों को हराने के बाद मुझे लगता है कि हमारा आत्मविश्वास और बढ़ गया क्योंकि वे बहुत अच्छा बैडमिंटन खेल रही थीं।"
इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने सेमीफाइनल में शीर्ष वरीयता प्राप्त लियू और टैन को कड़ी टक्कर दी। त्रिशा और गायत्री ने 18-21 से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए दूसरा गेम 10-10 से बराबर किया, लेकिन चीनी जोड़ी ने अपना खेल बेहतर करते हुए मैच को निर्णायक गेम तक खींचा और आखिरी गेम में दबदबा बनाए रखा।
गायत्री ने कहा, "क्वार्टर फाइनल में उतरते समय हमारी कोई उम्मीदें नहीं थीं और हमने बस अपने गेम प्लान पर अमल करने पर ध्यान दिया। क्वार्टर फाइनल के समय भी जब मैं कोर्ट पर जा रही थी, तो मुझे कोई उम्मीद नहीं थी क्योंकि हम पहले भी उनके खिलाफ खेल चुके हैं और मुझे पता था कि वे आसानी से प्वाइंट नहीं देंगी।"
उन्होंने आगे कहा, "इसी वजह से पहले गेम के बाद, हमने कुछ रणनीतियां बदलीं और धैर्य बनाए रखा, अपने प्लान पर डटे रहे और कुछ भी अजीब या अलग नहीं किया। मुझे लगता है कि इससे हमें फायदा हुआ और हम ब्रॉन्ज मेडल जीतकर बहुत खुश हैं।"
यह मेडल त्रिशा के लिए भी एक शानदार वापसी थी, जिनकी चोट के कारण इस जोड़ी का सीजन प्रभावित हुआ था। गायत्री के लिए यह उपलब्धि और भी खास थी, जिसका श्रेय कोर्ट पर अपनी पार्टनर के सपोर्ट और जोश को जाता है। गायत्री ने मुस्कुराते हुए कहा, "बिल्कुल। हालांकि, कभी-कभी मुझे हैरानी भी होती है। जब वह चिल्लाती है तो मैं चौंक जाती हूं और कभी-कभी डर भी जाती हूं। मगर मुझे लगता है कि इससे मेरा आत्मविश्वास भी बढ़ता है और कोर्ट पर उनकी मौजूदगी कमाल की होती है।"
घरेलू दर्शकों के सपोर्ट की वजह से यह मौका और भी भावुक करने वाला था। गायत्री ने माना कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि स्टेडियम खचाखच भरा होगा। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह मिलीजुली भावनाओं वाला अनुभव रहा। बहुत भावुक, बेहद खुश और कई तरह की भावनाएं थीं। कल जब मैं स्टेडियम में पहुंची, तो पूरा स्टेडियम भरा हुआ था। मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी। मैं बहुत खुश थी क्योंकि बैडमिंटन को आखिरकार वह पहचान मिल रही है जिसका वह हकदार है।"




