मुंबई। हिंदुस्तान-पाकिस्तान विभाजन के बाद हजारों लोग अपने घर-गलियों से हमेशा के लिए दूर हो गए। सिंधी समुदाय ने भी कई पीढ़ियों तक ये तकलीफ झेली, लेकिन उनकी कहानी आज तक पर्दे पर नहीं आई। इसे ध्यान में रखते हुए मशहूर निर्देशक इंद्रजीत लंकेश अपने दर्शकों के लिए सिंध समुदाय पर आधारित फिल्म 'जय हिंद जय सिंध अ लव स्टोरी' लेकर आ रहे हैं।
इंद्रजीत लंकेश ने आईएएनएस के साथ बातचीत में बताया कि उन्होंने फिल्म को इस कदर बनाया है, जिससे आज की जेन जी भी जुड़ सकेगी। उनका मानना है कि जब कोई व्यक्ति अपनी पहचान, इतिहास और अपने पूर्वजों की विरासत के लिए संघर्ष करता है, तो यह अपने आप में एक भावुक और संवेदनशील मुद्दा बन जाता है। यही फिल्म की कहानी की पृष्ठभूमि है।
उन्होंने कहा, "भारत में हम सभी को मिल-जुलकर और प्यार से रहना चाहिए। हमें ऐसे पड़ोसियों की तरह नहीं बनना चाहिए, जो धर्म, जमीन या अपने स्वार्थ को लेकर आपस में लड़ते रहें। हमें कभी ऐसी स्थिति में नहीं पहुंचना चाहिए, जहां हम एक-दूसरे से प्यार और भाईचारा करना ही भूल जाएं। भारत एक बहुत खूबसूरत देश है, जहां अलग-अलग संस्कृतियां, भाषाएं, धर्म और क्षेत्र हैं। इतनी विविधताओं के बावजूद यहां के लोग एक साथ मिलकर रहते हैं और एक देश के रूप में जुड़े हुए हैं। यही भारत की असली पहचान है और यही संदेश हम युवा पीढ़ी और जेन जी तक पहुंचाना चाहते हैं।"
निर्देशक इंद्रजीत लंकेश से आईएएनएस ने सवाल किया, "आज सोशल मीडिया की वजह से दर्शक अपनी राय खुलकर रखते हैं और लगभग हर फिल्म को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं। क्या आपको लगता है कि फिल्म इंडस्ट्री में लोगों की राय और दबाव पहले से बढ़ गया है?"
इस पर उन्होंने कहा, "नहीं, मुझे ऐसा नहीं लगता। सोशल मीडिया आज की युवा पीढ़ी और जेन जी के लिए एक बहुत अच्छा प्लेटफॉर्म है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब मीडिया की ताकत आम लोगों और युवाओं के हाथ में भी है।"
निर्देशक ने बताया कि करियर के शुरुआती दिनों में वह लेखन और पत्रकारिता से जुड़े थे। उन्होंने बताया, "एक पत्रकार होने के नाते मैंने इस बदलाव को बहुत पहले महसूस किया था। पहले पत्रकारिता और लोगों की आवाज मुख्य रूप से पत्रकारों और कुछ चुनिंदा लोगों तक ही सीमित थी, लेकिन आज यह आवाज युवाओं, आम जनता और हर आम इंसान तक पहुंच गई है।"
निर्देशक ने यह भी माना कि सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल से अक्सर गलत जानकारी भी फैलाई जाती है। उन्होंने कहा, "एक पत्रकार और फिल्ममेकर के तौर पर मैं इस बात का स्वागत करता हूं कि पत्रकारिता और आम लोगों की आवाज अब हर व्यक्ति तक पहुंच गई है। यह लोगों को अपनी बात रखने और अपनी राय जाहिर करने की आजादी देता है। आज गांव में बैठा कोई व्यक्ति भी अपनी आवाज दुनिया तक पहुंचा सकता है। यही वह असली अभिव्यक्ति की आजादी है, जिसकी हम हमेशा से बात करते रहे हैं।"




