खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी और नजीर पेश करने वाली कार्रवाई सामने आई है। इंदौर लोकायुक्त पुलिस द्वारा रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए एक पटवारी को सेवा नियमों के तहत सरकारी नौकरी से पूरी तरह बर्खास्त (Terminated) कर दिया गया है। आरोपी पटवारी ने एक जमीन के नामांतरण (म्यूटेशन) के एवज में रिश्वत की मांग की थी, जिसके बाद विशेष न्यायालय ने उन्हें कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इसी अदालती फैसले के आधार पर प्रशासनिक स्तर पर यह कड़ी कार्रवाई की गई है।


प्लॉट के नामांतरण के लिए मांगी थी 3 हजार की घूस, लोकायुक्त ने बुना था जाल

यह पूरा मामला खंडवा जिले के छायगांव माखन तहसील क्षेत्र का है। यहाँ हल्का नंबर-34 में दिनेश जगताप पटवारी के पद पर पदस्थ थे। घटना की पृष्ठभूमि के अनुसार, क्षेत्र के निवासी शिकायतकर्ता सादिक शेख ने अपनी पत्नी के नाम पर एक प्लॉट खरीदा था। इस प्लॉट का सरकारी रिकॉर्ड में नामांतरण कराने के लिए जब वे पटवारी दिनेश जगताप के पास पहुंचे, तो पटवारी ने काम करने के बदले 3 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की। सादिक शेख रिश्वत नहीं देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने सीधे लोकायुक्त पुलिस इंदौर कार्यालय में इसकी गोपनीय शिकायत दर्ज करा दी।


2019 में 500 रुपए की आंशिक रिश्वत लेते हुए पकड़े गए थे रंगे हाथों

लोकायुक्त पुलिस ने शिकायत का प्रारंभिक सत्यापन कराने के बाद जाल बिछाया। 16 सितंबर 2019 को लोकायुक्त की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए आरोपी पटवारी दिनेश जगताप को सादिक शेख से रिश्वत की आंशिक राशि (500 रुपए) लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया था। लोकायुक्त की टीम ने मौके पर ही पटवारी के हाथ धुलवाए, जिससे केमिकल के कारण उनके हाथ गुलाबी हो गए थे। इसके बाद पुलिस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर चालान न्यायालय में पेश किया था।


विशेष न्यायालय ने सुनाई 3 साल की जेल और कलेक्टर ने किया बर्खास्त

इस मामले पर खंडवा की विशेष अदालत में लंबी कानूनी सुनवाई चली। सभी गवाहों के बयानों और लोकायुक्त द्वारा पेश किए गए पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायालय खंडवा ने 31 मार्च 2026 को आरोपी पटवारी दिनेश जगताप को दोषी करार दिया। अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत उन्हें 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 15 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय से सजा का आदेश जारी होने के बाद खंडवा कलेक्टर ने शासकीय सेवा नियमों का पालन करते हुए 13 मई 2026 को एक आधिकारिक आदेश जारी कर दोषी पटवारी दिनेश जगताप को शासकीय सेवा से हमेशा के लिए बर्खास्त कर दिया। इस कार्रवाई से जिले के अन्य भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।