सतना। भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए देश का पहला निजी रॉकेट विक्रम-1 (Vikram-1) सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। यह ऐतिहासिक प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) के 'फर्स्ट लॉन्च पैड' से संपन्न हुआ। हैदराबाद स्थित स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) द्वारा विकसित इस रॉकेट की सफलता में मध्य प्रदेश के सतना जिले के होनहार एयरोस्पेस इंजीनियर रत्नेंद्र सिंह ने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
रत्नेंद्र सिंह बीते साढ़े चार वर्षों (2022 से) से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। प्रक्षेपण के दौरान उन्होंने रॉकेट के 'ब्रेन' को कंट्रोल करते हुए उसे उसकी निर्धारित कक्षा (ऑर्बिट) तक पहुंचाया। स्काईरूट की ओर से उन्हें रॉकेट का फ्यूल मैनेजमेंट, दिशा निर्धारण, GNC (गाइडेंस, नेविगेशन एंड कंट्रोल), एल्गोरिद्म डिजाइनिंग तथा ऑर्बिट वेरिफिकेशन जैसी अति-संवेदनशील जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। आखिरकार 18 जुलाई 2026 को यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अपनी पूर्ण सफलता तक पहुंचा।
तीसरी कक्षा में देखा सपना: कल्पना चावला से मिली प्रेरणा
सतना जिले के कोठरा गांव में जन्मे रत्नेंद्र सिंह के मन में अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने का अंकुर बचपन में ही फूट गया था। जब वह कक्षा तीसरी में थे, तब टीवी पर रॉकेट लॉन्चिंग देखकर उनके भीतर इस क्षेत्र में जाने की ललक जगी। आगे चलकर अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला से उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने की अटूट प्रेरणा मिली।
रत्नेंद्र सिंह का शैक्षणिक व व्यावसायिक सफर:
स्कूली शिक्षा: आर्मी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा पूरी की।
बीटेक (2015): देहरादून के कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक (B.Tech) की डिग्री हासिल की।
शुरुआती करियर: इंजीनियरिंग के बाद एक साल निजी कंपनी में नौकरी की, लेकिन दिल में स्पेस सेक्टर की ललक होने के कारण नौकरी छोड़ दी।
एमटेक: देश के प्रतिष्ठित आईआईएसटी (IIST - इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी), तिरुवनंतपुरम से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एमटेक पूरा किया।
पिता चाहते थे बेटा बने IAS, रत्नेंद्र ने चुनी अपनी राह
रत्नेंद्र सिंह के पिता पुष्पेंद्र सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और चाहते थे कि बेटा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर आईएएस (IAS) अधिकारी बने। हालांकि, रत्नेंद्र ने अपने दिल की बात सुनी और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के कठिन क्षेत्र को चुना। आज उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा देश गौरवान्वित है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि:
पिता: पुष्पेंद्र सिंह (सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी)
माता: ऋतु सिंह (गृहिणी)
बहन: शिल्पा सिंह (आईटी क्षेत्र में कार्यरत)
पत्नी: स्मृता सिंह (इसी वर्ष विवाह संपन्न हुआ)



