भेदभाव मिटाकर ही बनेगा विकसित भारत: डॉ. प्रदीप दुबे

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विराट हिन्दू सम्मेलन में गूंजा सामाजिक समरसता का मंत्र
छतरपुर,संजय अवस्थी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष समारोह के अंतर्गत सोमवार को छतरपुर के नौगांव रोड स्थित पेप्टेक टाउन कॉलोनी में विराट हिन्दू सम्मेलन का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस गरिमामयी कार्यक्रम में हजारों की संख्या में नागरिकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक (महाकौशल प्रांत) डॉ. प्रदीप दुबे, प्रसिद्ध संत योगी सत्यनाथ जी, मातृशक्ति के रूप में राष्ट्रपति सम्मान से पुरस्कृत मध्यप्रदेश की जलसहेली बबीता राजपूत मंचासीन रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत कन्या पूजन के साथ हुई, जिसके बाद पेप्टेक ग्रुप के डायरेक्टर विनय चौरसिया एवं अन्य गणमान्य जनों ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों के द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम का संचालन निक्की ताम्रकार ने किया।
सम्मेलन के मुख्य वक्ता, महाकौशल प्रांत के संघचालक डॉ. प्रदीप दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि हिन्दू सम्मेलन जनजातीय क्षेत्रों में, वनवासी क्षेत्रों में शहर गांव-गांव में संपन्न हो रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य है हमारा हिन्दू समाज के आत्मगौरव को जागृत करना। आज हिन्दू समाज में जो अश्पृश्यता की बीमारी है जिसने हमारे समाज को घुन की तरह कमजोर किया है उससे हमारे समाज के बचाना, समाज को संगठित करना जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी को विकसित भारत मिले। उनको विकासशील भारत मिले, उसके लिए हमको क्या करना होगा? इन समस्याओं के समाधान के लिए संपूर्ण हिन्दू समाज खड़ा हो, संपूर्ण हिन्दू समाज जागरुक हो, उसके लिए यह हिन्दू सम्मेलन हो रहे हैं। इसका कारण भी आप जानते होंगे कि वर्षों से हम पराधीन रहे, अंग्रेजों की गुलामी में हम जकड़े रहे। उन्होंने योजना पूर्वक हिन्दू समाज के आत्मविश्वास को समाप्त किया। उनके मन में भर दिया कि हम लोग अंधविश्वास, अनपढ़ और जाहिल समाज के लोग हैं।
श्रीराम का चरित्र अपनाएं: योगी सत्यनाथ
वहीं प्रसिद्ध संत योगी सत्यनाथ ने कहा कि हम प्रभु श्रीराम के आदर्शों को नहीं मानने वाले हैं, हम प्रभु श्रीराम का चित्र लेने वाले हैं लेकिन उनका चरित्र नहीं लेने वाले हैं। जिस दिन हमने श्रीराम के आदर्शों को माना, राम का चरित्र लिया उस दिन हमारा भारत भव्य बनेगा। आप चाहते हैं कि सनातन धर्म सुरक्षित रहे तो हमें श्रीराम के आदर्शों पर चलना होगा। हमें अपने मंत्रों से प्रार्थना से बहुत कुछ सीखना होगा। हम षडयंत्रों में फंस गए, हम आज से नहीं वैदिक काल से षडयंत्रों में फंसे हैं, वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था थी परंतु मुगलकाल आने के बाद हिन्दुओं को भेद-भाव में बांटा गया। यदि आप चाहते हैं कि आपका भविष्य सुरक्षित रहे। भगवा हिन्द बने तो भेदभाव मिटाना होगा।
समरसता भोज के साथ समापन
कार्यक्रम के समापन पर भारत माता की सामूहिक आरती आयोजित की गई, जिसमें पूरा परिसर वंदे मातरम और जय श्री राम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। इसके पश्चात आयोजित सामाजिक समरसता भोज में सभी वर्ग के लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण किया, जो समाज से ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त करने का एक सशक्त संदेश था।
