धरमजयगढ़ के संगरा नदी क्षेत्र में लाखों का अवैध कोयला डंप कार्रवाई अधूरी, प्रशासन सवालों के घेरे में

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छत्तीसगढ़,रोहित तिर्की। धरमजयगढ़ क्षेत्र के संगरा नदी इलाके में लाखों रुपये मूल्य के अवैध कोयले के डंप का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह अवैध कारोबार ठेकेदारी व्यवस्था के तहत संचालित किया जा रहा था, जहां मजदूरों से नदी क्षेत्र में अवैध कोयला खनन कराया गया और ट्रैक्टरों के माध्यम से उसका परिवहन किया जाता था।
सूत्रों के मुताबिक अवैध गतिविधियों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए पोकलेन मशीन की मदद से जंगल के भीतर सड़क का निर्माण किया गया था, जिससे भारी वाहनों की आवाजाही संभव हो सके। यह कृत्य वन कानूनों एवं पर्यावरण संरक्षण नियमों का खुला उल्लंघन है।
मामले की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और अवैध रूप से बनाई गई सड़क को बंद करने के उद्देश्य से गड्ढे खोदकर आवागमन रोक दिया। कार्रवाई के दौरान संगरा नदी क्षेत्र में भारी मात्रा में अवैध कोयले का डंप पाया गया, जिसकी कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है।
हालांकि कार्रवाई के बावजूद अब भी नदी किनारे अवैध कोयला जस का तस पड़ा हुआ है। संबंधित विभाग पूरे मामले की जांच की बात तो कर रहा है, लेकिन अब तक कोयले को जब्त करने अथवा हटाने की कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जिस जमीन पर अवैध कोयला डंप किया गया है, वह किस विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है—वन विभाग या राजस्व विभाग? विभागीय असमंजस के चलते क्या अवैध कारोबारियों को अप्रत्यक्ष संरक्षण मिल रहा है, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
इसके साथ ही यह प्रश्न भी उठता है कि कोयला जैसी राष्ट्रीय संपदा को खुले में, नदी क्षेत्र में इस तरह डंप कर छोड़ देना कितना उचित है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में केवल जांच तक सीमित रहता है या अवैध कोयला कारोबार पर सख्त और निर्णायक कार्रवाई कर दोषियों को कानून के कठघरे में लाता है।
