लंदन। ईरान ने दारखोविन में निर्माणाधीन परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर अमेरिकी हमले की निंदा की। ईरान के स्थायी मिशन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि सुरक्षा निगरानी (सेफगार्ड) के तहत चल रहे शांतिपूर्ण परमाणु केंद्रों पर होने वाले हमलों के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए।
ईरान की समाचार एजेंसी आईआरएनए की रिपोर्ट के अनुसार, "दारखोविन परमाणु ऊर्जा संयंत्र ईरान की बड़ी नागरिक परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य देश के बिजली ग्रिड के लिए बिजली पैदा करना है।" ईरान के अनुसार, 19 जुलाई रविवार को इस निर्माण स्थल पर अमेरिकी सेना ने हमला किया।
आईआरएनए की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बताया कि 19 जुलाई की सुबह अमेरिका ने करुन (दारखोविन) परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण स्थल पर कई मिसाइलें दागीं। ईरान ने कहा कि यह स्थल देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों और तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा है कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। ईरान का दावा है कि जून 2026 में अमेरिका और इजरायल की ओर से शुरू किए गए संयुक्त हमलों के बाद से उसके शांतिपूर्ण और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में चल रहे परमाणु केंद्रों पर यह 18वां हमला है।
ईरान के अनुसार, इन हमलों का मकसद केवल उसकी नागरिक बुनियादी सुविधाओं को नष्ट करना है, क्योंकि उसने दबाव के आगे झुकने और 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' करने से इनकार किया है।
आईआरएनए की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की ओर से कहा गया कि इससे एक बार फिर साबित होता है कि परमाणु प्रसार को लेकर लगाए जाने वाले आरोप सिर्फ झूठ, भ्रामक जानकारी और असली उद्देश्यों को छिपाने का तरीका हैं।
ईरान का कहना है कि इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के सबसे अहम सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन हैं और बेहद चिंता की बात यह है कि शांतिपूर्ण परमाणु केंद्रों पर हमले अब धीरे-धीरे सामान्य होते जा रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि संबंधित अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं अपना काम प्रभावी ढंग से नहीं कर पा रही हैं।
आईआरएनए के अनुसार, ईरान ने कहा कि अगर ऐसे हमलों पर चुप्पी साधी जाती है या कोई कार्रवाई नहीं होती, तो इससे हमलावर देशों का हौसला बढ़ता है और वे आगे भी ऐसे कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित होते हैं। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा है कि अगर यह रुझान जारी रहा तो दुनिया भर में आर्थिक विकास पर असर पड़ेगा, क्योंकि देशों का शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु विज्ञान और तकनीक के इस्तेमाल पर भरोसा कमजोर होगा।
इसी वजह से ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) से अपील की है कि वे इन हमलों की कड़ी निंदा करें और इन्हें रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं। ईरान ने कहा कि ऐसे हमले संयुक्त राष्ट्र चार्टर, परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) और आईएईए के उद्देश्यों और सिद्धांतों का भी उल्लंघन हैं।
आईआरएनए के अनुसार, ईरान ने कहा कि वह इस मामले में लगातार आईएईए के संपर्क में है। इसी सिलसिले में 19 जुलाई को ईरान के उपराष्ट्रपति और परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख ने आईएईए के महानिदेशक को पत्र लिखकर ऐसे हमलों के खिलाफ प्रभावी और उचित कार्रवाई करने की मांग की, क्योंकि ये वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था की विश्वसनीयता और मजबूती के लिए खतरा हैं।




