मुंबई। कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (केडीएमसी) के अस्पताल में डॉक्टर पर हमले और शिवसेना (शिंदे गुट) के कॉर्पोरेटर रमेश म्हात्रे की गिरफ्तारी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हालिया बयान और राम मंदिर चंदा चोरी मामले को लेकर कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कई मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया।अस्पताल में डॉक्टर पर हमले के आरोप में शिवसेना कॉर्पोरेटर रमेश म्हात्रे की गिरफ्तारी पर हुसैन दलवई ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी का अस्पताल पहुंच जाना पूरे मामले पर सवाल खड़े करता है। यदि किसी जनप्रतिनिधि ने डॉक्टर के साथ दुर्व्यवहार या हमला किया है तो केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि उससे इस्तीफा लिया जाना चाहिए या उसे पद से हटा देना चाहिए।
दलवई ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए। अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में डॉक्टर, नर्स और दवाइयों की उपलब्धता न होने के कारण मरीजों और परिजनों में असंतोष पैदा होता है, जिससे विवाद की स्थिति बनती है। इन कमियों के लिए डॉक्टर नहीं, बल्कि सरकार जिम्मेदार है। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर नहीं है, और इसी कारण ऐसी घटनाएं सामने आती हैं। डॉक्टरों पर हमला किसी भी स्थिति में उचित नहीं है, और यदि किसी से जवाबदेही तय करनी है, तो वह सरकार और उसके मंत्री हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस बयान पर भी दलवई ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें मुख्यमंत्री ने कहा था कि विपक्ष महाराष्ट्र को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। इस पर कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि किसी बड़ी दुर्घटना या प्रशासनिक चूक पर सवाल उठाए जाते हैं तो उसे राज्य को बदनाम करना नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने कहा कि जब कोई बड़ा हादसा होता है तो सरकार को उसकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और यह देखना चाहिए कि ऐसी घटना क्यों हुई तथा भविष्य में उसे कैसे रोका जाए। दुर्घटनाओं, लोगों की मौत, मैनहोल में गिरने जैसी घटनाओं पर विपक्ष यदि सवाल उठाता है तो उसे राज्य विरोधी बताना उचित नहीं है। मुख्यमंत्री को इस तरह के बयान देने के बजाय जवाबदेही तय करने और सुधारात्मक कदमों पर ध्यान देना चाहिए।
राम मंदिर चंदा चोरी मामले पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की चुप्पी को लेकर पूछे गए सवाल पर दलवई ने कहा कि यह कांग्रेस नेतृत्व की एक रणनीति हो सकती है। यदि राहुल गांधी इस विषय पर बोलते हैं तो उनके बयान को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा किया जाएगा और उन पर निराधार आरोप लगाए जाएंगे, इसलिए संभवतः उन्होंने इस मुद्दे पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। राम मंदिर चंदा विवाद से सरकार असहज स्थिति में है और आने वाले चुनावों में यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। यह केवल किसी मंदिर या चंदे का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और श्रद्धा से जुड़ा विषय है। भगवान राम के प्रति उनकी भी आस्था है और यदि श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ होता है तो यह बेहद गंभीर विषय है।




