टीकमगढ़। टीकमगढ़ शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाने वाला एक मामला सामने आया है। दरअसल टीकमगढ़ के मोटे का मोहल्ला निवासी एक पीड़ित महिला ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर गुहार लगाई है कि उसके पति की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, लेकिन घटना के एक महीने बाद भी कोतवाली पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं किया है। आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़ित परिवार को धमकियां दे रहे हैं।
पीड़िता हसीना बानो द्वारा एसपी को सौंपे गए आवेदन के अनुसार, यह खौफनाक वारदात पिछले महीने 6 मई 2026 को हुई थी। उनके पति स्वर्गीय जमील खान जब लुकमान चौराहा के आगे मंसूरी कयामगाह चौराहे के पास से गुजर रहे थे, तभी उन पर लोहे की रॉड, डंडों और धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया गया। हमले में गंभीर रूप से घायल जमील खान को तत्काल जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहां जिंदगी और मौत के बीच जूझते हुए आखिरकार 22 मई को उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
हसीना बानो का गंभीर आरोप है कि वारदात के तुरंत बाद ही इसकी सूचना कोतवाली पुलिस को दे दी गई थी। यही नहीं, परिजनों ने हमले में इस्तेमाल किया गया डंडा भी साक्ष्य के तौर पर पुलिस को सौंप दिया था। अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ने के बाद यह मामला सीधे तौर पर हत्या का बनता है, लेकिन इसके बावजूद कोतवाली पुलिस ने मामले में अब तक न तो हत्या की एफआईआर दर्ज की और न ही आरोपियों की धरपकड़ के लिए कोई कदम उठाया।
आरोपियों के नामजद होने पर भी पुलिस की निष्क्रियता
पीड़िता ने अपनी शिकायत में विवेक राय, शहादत खान उर्फ चाऊ और उनके अन्य सहयोगियों पर इस जानलेवा हमले और हत्या की पूरी साजिश रचने का सीधा आरोप लगाया है। हसीना बानो का कहना है कि पति की मौत के बाद से पूरा परिवार सहमा हुआ है, क्योंकि नामजद आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और केस वापस न लेने पर अंजाम भुगतने की धमकी दे रहे हैं।
जख्मी व्यक्ति की अस्पताल में मौत हो जाने के बाद भी मर्ग को कत्ल के मुकदमे में तब्दील न करना पुलिस की मंशा पर कई बड़े सवाल खड़े करता है। पीड़िता ने एसपी से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आरोपियों के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए, साथ ही इस मामले में घोर लापरवाही बरतने वाले कोतवाली थाने के जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय जांच की जाए। अब देखना होगा कि जिले के आला अधिकारी इस पीड़ित परिवार को कब तक और कैसा न्याय दिला पाते हैं।



