छतरपुर, जे.के. आशू। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में न्यायालय ने पिता की निर्मम हत्या करने वाले आरोपी पुत्र को आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश छतरपुर के न्यायालय द्वारा आरोपी पुत्र नरेन्द्र को भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 103(1) के तहत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 10,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है।
क्या था पूरा मामला?
मीडिया सेल प्रभारी, अभियोजन कार्यालय जिला छतरपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी नरेन्द्र निवासी गढ़ीमलहरा वार्ड नंबर 11 जो कि मृतक पूरनलाल का पुत्र है। आरोपी पहले भी किसी अन्य हत्या के मामले में सजा काटकर वापस आया था और अपने पिता के साथ ही रहता था। वह कोई कामकाज नहीं करता था, जिसके कारण उसके पिता पूरनलाल उसे हमेशा टोकते थे। इसी बात से नाराज होकर नरेन्द्र अक्सर अपने पिता से विवाद करता था। विवाद इस कदर बढ़ा कि दिनांक 11 नवंबर 2024 की रात्रि से लेकर 12 नवंबर 2024 की सुबह करीब 7 बजे के बीच, आरोपी नरेन्द्र ने अपने पिता पूरनलाल के सिर पर लकड़ी के पटिये (तख्ते) से ताबड़तोड़ कई वार किए। इस जानलेवा हमले में पूरनलाल के सिर पर गंभीर चोटें आईं और अत्यधिक रक्तस्राव होने के कारण मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई।
ऐसे हुआ मामले का खुलासा
मृतक का दूसरा बेटा भगवानचरण, जो अलग निवास करता था, सुबह करीब 5 बजे काम पर निकल गया था। सुबह 7 बजे जब उसने अपने पिता को फोन किया, तो फोन नहीं उठा। संदेह होने पर वह अपने साथी कर्मचारी हरप्रसाद के साथ पिता के घर पहुंचा। वहां रास्ते में ही उसे आरोपी नरेन्द्र अपने पिता के कमरे के बाहर काफी खून लगा हुआ और घसीटने के निशान छिपाते हुए मिला। जब भगवानचरण ने घर के भीतर जाकर देखा, तो उसके पिता पूरनलाल लहूलुहान और मृत अवस्था में पड़े हुए थे। उनके सिर पर गंभीर चोटों के निशान थे। फरियादी की सूचना के आधार पर थाना गढ़ीमलहरा द्वारा तुरंत मामला पंजीकृत कर विवेचना में लिया गया। संपूर्ण जांच और पुख्ता सबूतों के आधार पर पुलिस ने आरोपी नरेन्द्र के विरुद्ध माननीय न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) प्रस्तुत किया। न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से सशक्त पैरवी अपर लोक अभियोजक पंकज पाठक द्वारा की गई। उन्होंने सभी गवाहों और साक्ष्यों को मजबूती से अदालत के सामने पेश किया। विचारण के उपरांत, प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश छतरपुर ने आरोपी नरेन्द्र को पिता की हत्या का दोषी माना और उसे आजीवन कारावास तथा दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया।



