भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने एक बेहद गोपनीय और बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हुए देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के संदेह में एक संदिग्ध युवक (स्लीपर सेल) को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पकड़े गए आरोपी की पहचान मोहम्मद फराज के रूप में हुई है, जिसे एटीएस की टीम ने शुक्रवार सुबह भोपाल के घने काजी कैंप इलाके में स्थित 'नन्हें बी की मस्जिद' के समीप से घेराबंदी कर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को भोपाल जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 16 जून 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां अब आरोपी के स्थानीय संपर्कों, वित्तीय स्रोतों और देशव्यापी नेटवर्क को खंगालने में जुट गई हैं।
सुरक्षा एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, मोहम्मद फराज के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) और राष्ट्रद्रोह से जुड़ी गंभीर व सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। शुरुआती पूछताछ में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और देश की आंतरिक सुरक्षा को गंभीर चुनौती देने वाले हैं। आरोपी फराज सीधे तौर पर टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से सीमा पार बैठे पाकिस्तानी हैंडलर्स (आतंकी संगठनों) के निरंतर संपर्क में था। पाकिस्तानी आकाओं ने उसे भारत में माहौल बिगाड़ने और समय आने पर 'टार्गेट किलिंग' (चुनिंदा हत्याओं) को अंजाम देने के लिए एक स्लीपर सेल के रूप में तैयार किया था। इसके लिए उसे लगातार कट्टरपंथी व जिहादी वीडियो भेजे जा रहे थे। पूछताछ में आरोपी ने कबूला है कि ऑनलाइन मीटिंग्स के जरिए उसे इस्लामिक कट्टरपंथ के विस्तार और जिहाद की बाकायदा कसमें खिलाई गई थीं। इस पूरे खेल में उत्तर प्रदेश के देवबंद का रहने वाला उसका एक दोस्त 'नईम' मुख्य कड़ी था, जिसने ही फराज का परिचय पाकिस्तानी हैंडलर्स से कराया था।
स्पेशल ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान जाने की थी तैयारी
पकड़े जाने से पहले तक मोहम्मद फराज भोपाल में ही एक डॉक्टर के क्लीनिक पर कर्मचारी के रूप में कार्य कर रहा था ताकि किसी को उस पर शक न हो। हालांकि, खुफिया एजेंसियों को लंबे समय से उसकी संदिग्ध हरकतों के इनपुट मिल रहे थे।
जांच में बड़ा खुलासा: प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपी फराज आतंकी गतिविधियों की 'स्पेशल मिलिट्री ट्रेनिंग' लेने के लिए वाया पाकिस्तान होते हुए अफगानिस्तान जाने की फिराक में था और इसके लिए बकायदा तैयारी कर रहा था।
एटीएस ने छापेमारी के दौरान आरोपी के मोबाइल फोन से पाकिस्तान से भेजी गई कई प्रतिबंधित और बेहद आपत्तिजनक जिहादी दस्तावेजी पीडीएफ (PDF) फाइलें बरामद करने का दावा किया है। इसके साथ ही उसके तमाम डिजिटल डेटा, डिलीट की गई चैट्स और ऑनलाइन क्लाउड गतिविधियों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।
मार्शल आर्ट की ले रहा था ट्रेनिंग, डार्क ऐप्स का करता था उपयोग
जांच अधिकारियों के मुताबिक, फराज खुद को शारीरिक रूप से मजबूत करने और हमलों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से मार्शल आर्ट की पेशेवर ट्रेनिंग भी ले रहा था। इसके अलावा, वह सामान्य इंटरनेट के बजाय 'डार्क वेब' और कुछ डार्क कम्युनिकेशन ऐप्स के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर के संदिग्ध व प्रतिबंधित ग्रुप्स से जुड़ा हुआ था। एटीएस की साइबर सेल उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स की गहन स्क्रूटनी कर रही है, जिसमें यह भी सामने आया है कि उसने पूर्व में गाजा पट्टी के समर्थन में भारत विरोधी और अत्यंत आपत्तिजनक टिप्पणियां पोस्ट की थीं।
देवबंद कनेक्शन और स्थानीय नेटवर्क की पड़ताल जारी
इस पूरे मामले के तार उत्तर प्रदेश के देवबंद से भी जुड़ रहे हैं। जांच के दौरान देवबंद मदरसे से जुड़े कुछ संदिग्धों के मोबाइल नंबर और संपर्कों की जानकारी एटीएस के हाथ लगी है, जिनकी भूमिका की जांच के लिए एक विशेष टीम रवाना की जा सकती है। एटीएस मुख्य रूप से यह पता लगाने में जुटी है कि भोपाल और मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों में फराज के अलावा और कौन-कौन से लोग इस स्लीपर सेल नेटवर्क का हिस्सा हैं और क्या इन्हें स्थानीय स्तर पर कोई बड़ा लॉजिस्टिक या वित्तीय सपोर्ट मिल रहा था।
उल्लेखनीय है कि देश की सुरक्षा से जुड़े इस बेहद संवेदनशील ऑपरेशन को एटीएस ने पूरी तरह सीक्रेट (गोपनीय) तरीके से अंजाम दिया। इस पूरी कार्रवाई और योजना की भनक भोपाल पुलिस के सीनियर अफसरों तथा स्थानीय पुलिस थाने तक को नहीं लगने दी गई थी। सीधे एटीएस की टीम ने दबिश देकर आरोपी को उठाया और कोर्ट में पेश किया। फिलहाल, रिमांड अवधि के दौरान एटीएस फराज को रिमांड पर लेकर देश के अन्य राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के साथ संयुक्त पूछताछ कर रही है ताकि इसके पूरे सिंडिकेट को नेस्तनाबूद किया जा सके।

