नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), शिक्षा में नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पंजाब में एनआरआई से जुड़े मुद्दों पर भाजपा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने आईएएनएस से कहा, "एसआईआर का विरोध करने वालों को गलतफहमी थी। एसआईआर का मतलब है फर्जी वोटरों को हटाना और वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाना। अगर किसी व्यक्ति की मौत हो गई है, वह कहीं और चला गया है या अब वहां नहीं रहता है, तो वोटर लिस्ट में उसका नाम रखने का कोई मतलब नहीं है। इसीलिए पश्चिम बंगाल में वोटिंग का प्रतिशत 80, 90 और यहां तक ​​कि 95 प्रतिशत तक पहुंच गया है। साफ-सुथरी वोटर लिस्ट के आधार पर वोटिंग से बनी सरकारें बेहतर सरकारें होती हैं। अब उन्होंने इसे मान लिया है, और यह अच्छी बात है।"

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर अपनी राय रखते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि यह नीति बहुत सोच-विचार के बाद बनाई गई थी। लेकिन कोई भी चीज कभी पूरी तरह से परफेक्ट नहीं होती। आज भी समय की जरूरतों के हिसाब से बदलाव की जरूरत होती है, और सुधार की प्रक्रिया जारी रहती है।"

शिक्षा और रोजगार के संबंध पर बोलते हुए लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने कहा कि शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने एसोचैम द्वारा आयोजित शिक्षा संबंधी समिट की सराहना करते हुए कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि शिक्षा की दिशा तय की जाए और इसे रोजगार-उन्मुख कैसे बनाया जाए। बच्चों में इनोवेशन करने, स्टार्टअप शुरू करने और नौकरी मांगने वाले के बजाय नौकरी देने वाले बनने का आत्मविश्वास पैदा होना चाहिए। मेरा मानना ​​है कि यह समिट इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा।"

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर अपने विचार रखते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि एआई का सदुपयोग अत्यंत लाभकारी हो सकता है, लेकिन इसका दुरुपयोग समाज के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। उन्होंने एआई की तुलना पौराणिक पात्र ‘भस्मासुर’ से करते हुए कहा कि यह तकनीक जितनी शक्तिशाली है, उसका गलत इस्तेमाल उतना ही खतरनाक साबित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन एआई के सकारात्मक और रचनात्मक उपयोग को बढ़ावा देने का है लेकिन वर्तमान समय में जिस प्रकार कुछ युवा इसका दुरुपयोग कर रहे हैं, वह चिंता का विषय है।