भोपाल। मध्य प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 1998 से 2009 के बीच नियुक्त प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के लिए आयोजित की जा रही शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के शुल्क को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा प्रति अभ्यर्थी 1000 रुपये परीक्षा शुल्क तय किए जाने का शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। प्रदेश के लगभग 1.50 लाख शिक्षक इस परीक्षा के दायरे में आ रहे हैं, जिससे अकेले परीक्षा शुल्क के रूप में करीब 15 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे। शिक्षक संगठनों का दावा है कि परीक्षा आयोजन पर होने वाला वास्तविक खर्च इस वसूली राशि से कहीं कम है।


'नई नौकरी नहीं, सेवा बचाने की परीक्षा': सरकार खुद उठाए खर्च

शिक्षक संयुक्त मोर्चा और विभिन्न शिक्षक संगठनों का तर्क है कि यह किसी नई नियुक्ति या सीधी भर्ती की परीक्षा नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिपालन में सेवारत शिक्षकों को अपनी नौकरी में बने रहने के लिए दी जाने वाली पात्रता परीक्षा है। ऐसे में परीक्षा का पूरा वित्तीय भार शासन को उठाना चाहिए। संगठनों ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से 26 अगस्त तक मुलाकात का समय मांगा है। साथ ही निर्णय होने तक प्रदेशभर के शिक्षकों से परीक्षा फॉर्म न भरने की अपील की है। 21 अगस्त से 9 सितंबर तक आवेदन और कियोस्क शुल्क के साथ फॉर्म भरे जाने हैं।


सीएम राइज का हवाला देकर निशुल्क और ऑफलाइन परीक्षा की मांग

शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि पूर्व में सीएम राइज, मॉडल और उत्कृष्ट विद्यालयों की चयन परीक्षाओं का पूरा खर्च शासन ने वहन किया था, इसलिए सेवारत शिक्षकों से 1000 रुपये लेना पूरी तरह अनुचित है। इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि ग्रामीण और सुदूर अंचलों में इंटरनेट व सर्वर की समस्याओं को देखते हुए ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन (ओएमआर शीट आधारित) परीक्षा आयोजित कराई जाए, ताकि किसी भी शिक्षक को तकनीकी दिक्कतों का सामना न करना पड़े।


वंचित शिक्षकों की अधिकृत सूची जारी करने और जंतर-मंतर कूच की चेतावनी

संगठन ने यह भी मांग उठाई कि शिक्षा विभाग के पास सभी सेवारत शिक्षकों का पूर्ण सेवा रिकॉर्ड मौजूद है, इसलिए विभाग को सीधे उन शिक्षकों की सूची जारी करनी चाहिए जो अब तक टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं, जिससे भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रणनीति भी तैयार हो चुकी है। मध्य प्रदेश के विभिन्न शिक्षक संगठनों ने घोषणा की है कि 30 अगस्त को देशभर के प्रभावित शिक्षक दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटेंगे और केंद्र सरकार से शिक्षकों के हित में अध्यादेश लाने की पुरजोर मांग करेंगे।