इंदौर। मध्य प्रदेश की व्यापारिक नगर इंदौर में पदस्थ बिजली विभाग के अधीक्षण यंत्री के नौ ठिकानों पर लोकायुक्त ने दबिश दी तो करोड़ों की संपत्ति का खुलासा हुआ है, उनकी यह संपत्ति आय से 258 प्रतिशत से अधिक है । लोकायुक्त से मिली जानकारी के अनुसार शिवराम सेमिल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की जानकारी मिली थी। वे अधीक्षण यंत्री मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर में कार्यरत हैं। इनके द्वारा अपने 33 वर्ष के सेवाकाल में अपनी वैध आय की तुलना में बहुत अधिक संपत्ति अवैध रूप से प्राप्त की है। बताया गया है कि लोकायुक्त तक जो सूचनायें आई थी इसका परीक्षण किया गया और जब सही पाई गई तो उनके नौ ठिकानों इंदौर के चार ठिकानों, पीथमपुर के 2 ठिकानों, धार के 2 ठिकानों और मुरैना के 1 ठिकाने पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया । इस अभियान में इंदौर के सिलिकॉन सिटी में सी 44 स्थित भूखंड पर तीनमंजिला भव्य आवास निर्मित पाया गया जिसकी अनुमानित लागत एक करोड़ 20 लाख रुपए आंकी गई है।

इसके अलावा लोकायुक्त को इंजीनियर सेमिल के पुत्र शुभम के नाम से पीथमपुर सेक्टर 3 में प्लॉट क्रमांक 749 पर "शुभम इलेक्ट्रिकल" नाम से फैक्ट्री पाई गई है जहां ट्रांसफार्मर बनाए जाते हैं। यह फैक्ट्री 880 वर्गमीटर एरिया में बनाई गई है। कुल अनुमानित व्यय सवा करोड़ रूपये आंका गया है। वही पुत्रवधू और परिवार के सदस्यों के नाम पर एक कंपनी पंजीबद्ध है जिसकी शेयर पूंजी 50 लाख है और एक करोड़ लागत की फैक्ट्री भी स्थापित है।

इसी तरह उज्जैन में लगभग डेढ़ करोड़ रुपए की फैक्ट्री का भी खुलासा हुआ है । बताया गया है कि आरोपी इंजीनियर सेमिल को संपूर्ण सेवाकाल जो 33 वर्ष है इसमें 2 करोड़ रुपए के कुल वेतन की तुलना में उसके द्वारा साढ़े छह करोड़ रूपए व्यय करना पाया गया। जीवन यापन व्यय यदि कुल आय का 33 प्रतिशत लिया जाए तो कुल व्यय 7 करोड़ 16 लाख से अधिक व्यय आरोपी द्वारा किया गया है जो आय से 258 प्रतिशत ग़ैर अनुपात व्यय किया गया है।

लोकायुक्त ने आरोपी बिजली विभाग के इंजीनियर के विरूद्ध धारा 13(1) बी,13(2) भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 के अन्तर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। टीम द्वारा कार्यवाही की जा रही है।