दमोह, राजेन्द्र तिवारी। दमोह जिले के नए कलेक्टर प्रताप नारायण यादव इन दिनों अपने अलग कार्यशैली और जनसंपर्क के कारण चर्चा में हैं। उन्होंने अपनी पहली कलेक्ट्री की पहली “रात्रि चौपाल” के लिए किसी शहर या मुख्यालय को नहीं, बल्कि तेंदूखेड़ा ब्लॉक के दूरस्थ गांव दौनी सरकार धाम को चुना। यहां रात 8 बजे से 11 बजे तक चौपाल आयोजित की गई, जिसमें ग्रामीणों की समस्याएं सुनकर मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए गए।


रात्रि चौपाल में जिले के विभिन्न विभागों का अमला मौजूद रहा। ग्रामीणों ने पेंशन, पेयजल, राशन, सड़क और प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ी समस्याएं खुलकर कलेक्टर के सामने रखीं। कलेक्टर यादव ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल निराकरण के निर्देश दिए। कई मामलों में अवकाश के दिन भी विशेष शिविर लगाकर समस्याओं का समाधान करने को कहा गया।


चौपाल की खास बात यह रही कि कलेक्टर ने केवल समस्याएं सुनकर वापस लौटने के बजाय रात भी गांव में ही बिताई। प्रशासनिक अधिकारी का ग्रामीण क्षेत्र में रुकना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। ग्रामीणों ने इसे “आपकी सरकार आपके द्वार” की वास्तविक तस्वीर बताया।


अगली सुबह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव एक बार फिर अलग अंदाज में नजर आए। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ और श्रमदान कार्यक्रम के तहत उन्होंने हाथ में तसला और झाड़ू लेकर ग्रामीणों के साथ सफाई अभियान में हिस्सा लिया। जल संरक्षण और स्वच्छता को लेकर ग्रामीणों को जागरूक करते हुए उन्होंने सामूहिक भागीदारी का संदेश दिया।


कलेक्टर यादव की इस सक्रियता और जमीनी कार्यशैली को प्रशासनिक हलकों में सकारात्मक पहल माना जा रहा है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि उनका यह “मैदानी मॉडल” जिले की व्यवस्थाओं में कितना बदलाव ला पाता है।