दतिया। मध्य प्रदेश की हाई-प्रोफाइल दतिया विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के घोषित उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने रविवार को मां पीतांबरा पीठ में विशेष दर्शन-पूजन के साथ अपने चुनावी अभियान का औपचारिक आगाज़ कर दिया है। भाजपा प्रत्याशी घोषित होने के बाद आशुतोष तिवारी पहली बार दतिया स्थित विश्व प्रसिद्ध मां पीतांबरा पीठ पहुंचे, जहाँ उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर चुनावी अभियान की सफलता, प्रदेश की खुशहाली और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
इस दौरान मंदिर परिसर में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। सबसे खास बात यह रही कि इस कार्यक्रम में पूर्व गृहमंत्री डॉ। नरोत्तम मिश्रा के समर्थक माने जाने वाले कई प्रमुख कार्यकर्ताओं की मौजूदगी भी खुलकर सामने आई, जिसे राजनैतिक गलियारों में भाजपा की एकजुटता और डैमेज कंट्रोल की बड़ी सफलता से जोड़कर देखा जा रहा है।
सेवढ़ा विधायक प्रदीप अग्रवाल की मौजूदगी में बनी चुनावी रणनीति
पीतांबरा पीठ परिसर में आशुतोष तिवारी के आगमन पर सेवढ़ा विधायक प्रदीप अग्रवाल, भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में उत्साहित कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं के साथ उनका आत्मीय स्वागत किया। दर्शन-पूजन की प्रक्रिया संपन्न करने के बाद आशुतोष तिवारी ने मंदिर परिसर में ही संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों और जमीनी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान आगामी उपचुनाव की रणनीति, बूथ प्रबंधन और प्रचार-प्रसार की तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। माना जा रहा है कि मां पीतांबरा का आशीर्वाद लेकर तिवारी ने दतिया के इस सियासी महासंग्राम के लिए शंखनाद कर दिया है और अब आने वाले दिनों में भाजपा पूरे दमखम के साथ चुनाव प्रचार में जुटती नजर आएगी।
नरोत्तम समर्थकों की उपस्थिति रही चर्चा का विषय
टिकट वितरण के बाद दतिया भाजपा में उपजे भारी असंतोष और बगावत के बाद, रविवार को हुए इस कार्यक्रम में पूर्व गृहमंत्री डॉ। नरोत्तम मिश्रा के खेमे के माने जाने वाले कई कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने राजनैतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि, भाजपा संगठन या वरिष्ठ नेताओं की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि नरोत्तम समर्थकों का आशुतोष तिवारी के स्वागत और रणनीति बैठक में शामिल होना यह संकेत देता है कि भोपाल में हुई मुख्यमंत्री और नरोत्तम मिश्रा की बैठक का असर दिखने लगा है। भाजपा अब अंदरूनी कलह को पीछे छोड़कर पूरी तरह से एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने का संदेश देने का प्रयास कर रही है।




