पन्ना (अमित सिंह राठौर): पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई ने एक बार फिर दर्दनाक रूप ले लिया। मडला वन परिक्षेत्र की जूड़ी बीट में बाघ पी-661 के हमले में बाघिन पी-151 की 17 महीने की फीमेल शावक की मौत हो गई। घटना कंचन नाला और हत्यारा नाला के बीच हुई।

घटना का क्रम

वन विभाग के अनुसार, बाघ पी-661 सुबह से ही पूरे क्षेत्र में सक्रिय था और बाघिन पी-151 व उसके शावकों पर नजर रखे हुए था। बाघिन ने अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए हमलावर नर बाघ का डटकर सामना किया, जिसके चलते बाघ कुछ देर के लिए पीछे हट गया।

हालांकि दोपहर के समय जब बाघिन शावकों के साथ आगे बढ़ गई और 17 महीने की फीमेल शावक थोड़ी पीछे रह गई, उसी मौके का फायदा उठाते हुए बाघ पी-661 ने उस पर हमला बोल दिया। हमले में शावक गंभीर रूप से घायल हो गई और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

प्राकृतिक व्यवहार या प्रबंधन की चुनौती?

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, नर बाघों द्वारा दूसरे बाघों के शावकों पर हमला करना उनके प्राकृतिक व्यवहार का हिस्सा है। वे अपने क्षेत्र पर पूर्ण वर्चस्व चाहते हैं और दूसरी नर बाघिन के शावकों को खत्म करके अपनी संतान को जगह बनाना चाहते हैं।

पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ना संरक्षण की बड़ी सफलता है, लेकिन बढ़ती संख्या के साथ टेरिटोरियल संघर्ष की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं।

वन विभाग की भूमिका पर सवाल

वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर शावक के शव का पंचनामा तैयार किया और पोस्टमार्टम कराया। हालांकि घटना को लेकर पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है, जिसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मत: संवेदनशील क्षेत्रों में सतत निगरानी, बाघों की गतिविधियों पर प्रभावी ट्रैकिंग और समय पर पारदर्शी जानकारी साझा करना प्रबंधन की बड़ी जिम्मेदारी है।

यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि जंगलों में प्राकृतिक संघर्ष तो चलता रहता है, लेकिन मजबूत प्रबंधन और निगरानी से ऐसे दर्दनाक हादसों को कम किया जा सकता है।