मंदसौर। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के नाहरगढ़ क्षेत्र से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है। सोयाबीन की फसल बर्बाद होने के बाद सरकारी अमले द्वारा तैयार किए गए 80 प्रतिशत तक नुकसान के पंचनामे के बावजूद बीमा कंपनी द्वारा किसानों को महज 8 प्रतिशत के आसपास क्लेम राशि दी गई है। इस भारी अंतर से आक्रोशित किसानों ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच और उचित मुआवजा देने की मांग की है।


80% का पंचनामा और 8% का भुगतान: आखिर कहां हुई गड़बड़ी?

किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा से फसल तबाह होने पर कृषि विभाग के अधिकारियों, पटवारियों और ग्राम सेवकों ने खेतों में पहुंचकर उनकी मौजूदगी में नुकसान का विस्तृत सर्वे किया था। मौके पर तैयार पंचनामे में कई स्थानों पर 80 प्रतिशत तक फसल क्षति दर्ज की गई थी।


हालांकि, जब बीमा राशि खातों में पहुंची तो क्लेम का प्रतिशत घटकर लगभग 8% रह गया। किसानों का सीधा सवाल है कि:


जब सरकारी कर्मचारियों ने मौके पर 80% नुकसान का पंचनामा बनाया, तो बीमा कंपनी ने इसे घटाकर 8% कैसे कर दिया?

क्या बीमा कंपनी का निजी सर्वे सरकारी अधिकारियों और राजस्व अमले के पंचनामे से ऊपर है?


एक ही क्षेत्र और एक जैसे मौसम के बावजूद क्लेम में बड़ा अंतर

नाहरगढ़ क्षेत्र के किसानों के आक्रोश की एक बड़ी वजह पड़ोस की मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के सीमावर्ती गांवों से मिल रही क्लेम राशि का अंतर भी है। किसानों के अनुसार, नाहरगढ़ से सटे गांवों में समान मौसम, एक जैसी मिट्टी और फसल क्षति के बावजूद 15 से 20 प्रतिशत तक बीमा क्लेम दिया गया है, जबकि नाहरगढ़ में यह आंकड़ा 8 प्रतिशत पर ही सिमट गया। एक जैसी परिस्थितियों में अलग-अलग गांवों के लिए बीमा क्लेम का मूल्यांकन अलग-अलग नियमों से किए जाने पर किसानों ने सवाल खड़े किए हैं।


जनप्रतिनिधियों व स्थानीय अधिकारियों के समक्ष बढ़ा आक्रोश, उच्चस्तरीय जांच की मांग

फसल बीमा क्लेम में हुई इस विसंगति को लेकर स्थानीय पटवारियों, ग्राम सेवकों और जनप्रतिनिधियों को किसानों के भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। फसल में बीज, खाद और कड़ी मेहनत लगाने के बाद कम क्लेम मिलने से किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।


किसानों की मुख्य मांगें:


खेतों में किए गए पुराने सर्वे व पंचनामे, बीमा कंपनी की रिपोर्ट और जारी क्लेम आंकड़ों का भौतिक मिलान कराया जाए।

बीमा कंपनी के सर्वे और सरकारी पंचनामे के बीच के अंतर की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो।

वास्तविक नुकसान (पंचनामे के आधार पर) के अनुसार अंतर राशि का भुगतान कर किसानों को उचित मुआवजा दिलाया जाए।