सतना, अंबिका केशरी। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के तहत सड़क निर्माण कार्य करने वाले संविदाकारों (ठेकेदारों) का विभागीय अव्यवस्थाओं, कथित भ्रष्टाचार, भुगतान में देरी और अधिकारियों की कार्यशैली के विरोध में अनिश्चितकालीन अनशन बुधवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। इस दौरान जिला पंचायत के सीईओ और एसडीएम अनशन स्थल पहुंचे तथा संविदाकारों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं। संविदाकारों ने अधिकारियों को मांगों और शिकायतों से संबंधित ज्ञापन भी सौंपा।
संविदाकारों का आरोप है कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के अभाव और कुछ अधिकारियों की कथित तानाशाही के कारण उन्हें भारी मानसिक दबाव में कार्य करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जल संवर्धन योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने के लिए नई बनी सड़कों के शोल्डर खोदे जा रहे हैं, जिससे सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं। इसके बावजूद सड़क खराब होने का जिम्मेदार ठेकेदारों को ठहराकर उनके कार्यों का मूल्यांकन कम किया जाता है और भुगतान रोक दिया जाता है या बेहद कम कर दिया जाता है।
शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि जिले में नहर निर्माण के लिए भारी वाहनों और मशीनों की आवाजाही से सड़कों की डामर परत उखड़ रही है, लेकिन इसकी जवाबदेही संबंधित विभागों पर तय करने के बजाय संविदाकारों पर कार्रवाई का दबाव बनाया जा रहा है। ठेकेदारों ने इसे मानसिक प्रताड़ना और अनुचित दबाव बताते हुए विभाग में व्याप्त कथित कमीशनखोरी को समाप्त करने की मांग की है।
संविदाकारों ने ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान निविदा शर्तें कुछ चुनिंदा बड़े ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने वाली हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसी शर्तों में संशोधन कर स्थानीय और छोटे संविदाकारों को भी समान अवसर उपलब्ध कराया जाए। संविदाकारों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो उनका आंदोलन आगे और तेज किया जाएगा।




