छतरपुर। शहर के बहुचर्चित MCX कांड यानि की व्यापारी राजेश अग्रवाल आत्महत्या मामले में मंगलवार को एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। एक तरफ जहाँ पीड़ित परिवार के रुख में नरमी देखी गई, वहीं दूसरी ओर न्यायालय ने मामले की गंभीरता और तकनीकी साक्ष्यों को देखते हुए आरोपियों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है।


दरअसल मंगलवार को इस मामले के मुख्य आरोपी शरद अग्रवाल सहित अन्य आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई होना थी। सुनवाई से ठीक पहले मृतक राजेश अग्रवाल की 70 वर्षीय माँ ने न्यायालय में एक सहमति पत्र पेश किया, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि आरोपियों को जमानत दी जाती है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। आमतौर पर परिवार की सहमति ही जमानत का मजबूत आधार बनती है, लेकिन इस मामले में पुलिस द्वारा पेश की गई कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी कि सीडीआर ने बाजी पलट दी। पुलिस ने साक्ष्यों के साथ बताया कि आरोपी सट्टेबाजी और पैसों की वसूली के लिए मृतक पर दबाव बना रहे थे। न्यायालय ने इन गंभीर प्रमाणों को आधार मानते हुए शरद अग्रवाल सहित अन्य आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।


आरोपियों की जमानत पर आपत्ति लगाने वाले अधिवक्ता रवि पांडे ने बताया कि जमानत का खारिज होना न्यायालय का डिस्क्रीशन पावर है। हमारा काम उसमें पुरजोर पैरवी करना था, जो आज हमारे द्वारा की गई थी। आज शरद अग्रवाल के लिए मृतक राजेश अग्रवाल की मां के द्वारा एक एफिडेविट पेश किया गया था कि अगर जमानत होती है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन कल भावना अग्रवाल की ओर से जो मैंने आपत्ति लगाई थी कि इन तीनों की जमानत में हमें आपत्ति है और इनकी जमानत रिजेक्ट की जाए, क्योंकि ये अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं और इनका रसूख है। निश्चित तौर पे ही इनको अगर जमानत का लाभ मिलेगा तो ये इन्वेस्टिगेशन को प्रभावित करेंगे। आज न्यायालय में अपने तर्क के दौरान इस बात पर पुरजोर ज़ोर दिया था कि रोहित पटैरिया का जो मेमोरेंडम लिया है, उसमें इनकी पूर्ण रूप से संलिप्तता है इन आरोपियों की। और जो पुलिस के द्वारा रिकॉर्डिंग तैयार की गई है, जिसमें इन लोगों के द्वारा लगातार मृतक को धमकाया गया है और आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण किया गया है, न्यायालय के द्वारा इन्हीं तर्कों को कंसीडर करके और इन आरोपियों की अग्रिम जमानत निरस्त की गई है।


आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर इस केस को लेकर चल रही भ्रामक खबरों ने तूल पकड़ लिया है। फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर कुछ अज्ञात लोग यह दावा कर रहे थे कि आरोपियों की जमानत के लिए एक बाबू के जरिए 35 लाख रुपये में डील हुई है। इन टिप्पणियों को न्यायपालिका की छवि खराब करने की साजिश बताते हुए बीते रोज छतरपुर के अधिवक्ताओं ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश रविंदर सिंह को ज्ञापन सौंपा था। अधिवक्ता रवि पांडे ने बताया कि इस शिकायत पर न्यायाधीश ने संज्ञान लेते हुए पुलिस को जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर बिना प्रमाण टिप्पणी करने वालों के खिलाफ FIR भी दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर पुलिस ने फरार चल रहे सट्टा माफियाओं और सूदखोरों पर शिकंजा कसने के लिए रविवार की रात और सोमवार की सुबह से छतरपुर के प्रमुख स्थानों जैसे मुख्य बस स्टैंड, चौबे तिराहा और छत्रसाल चौक पर आरोपी रोहित पटेरिया, अनवर खान, शरद अग्रवाल, सुरेश नगरिया, कल्लू कलई और मोनू उर्फ दीपक अग्रवाल के पोस्टर लगाए थे।


घटना की पृष्ठभूमि

उल्लेखनीय है कि मूल रूप से बरुआ सागर (झांसी) के रहने वाले 50 वर्षीय राजेश अग्रवाल छतरपुर में किराए के मकान में रहकर कारोबार करते थे। 26 मई की रात वह अपने कमरे में सोने गए और दो दिनों तक बाहर नहीं निकले। 28 मई को पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो राजेश का शव जमीन पर पड़ा मिला। पास ही सल्फास की डिब्बी और एक दर्दनाक सुसाइड नोट बरामद हुआ।


सुसाइड नोट से हुआ था खुलासा

राजेश ने अपने सुसाइड नोट में रोहित उर्फ छोटू पटैरिया के साथ ऑनलाइन MCX सट्टे का काम करने की बात कबूली थी। रोहित द्वारा किए गए एक गलत सौदे ने राजेश को 10 लाख रुपये के कर्ज में डुबो दिया। इसके बाद छतरपुर के बड़े सटोरियों और सूदखोरों ने उन्हें प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। मृतक की माँ कृष्णा अग्रवाल के अनुसार, आरोपी अनवर खान, शरद अग्रवाल, सुरेश नगरिया, कल्लू कलई और मोनू अग्रवाल लगातार धमकी दे रहे थे। आरोपियों ने कहा था कि यदि 10 दिन में पैसे नहीं मिले, तो पूरे परिवार को सड़क पर लाकर भीख मंगवा देंगे। मामले की जांच के बाद ओरछा रोड थाना पुलिस ने IPS लेखराज मीणा के निर्देशन में छह नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा धारा 108, आपराधिक साजिश की धारा 61/2 और धमकी देने की धारा 351/2 के तहत एफआईआर दर्ज की थी।