नई दिल्ली। बिहार के गया में 15 जून को एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर की आधारशिला रखी जाएगी। दक्षिण बिहार और मगध क्षेत्र के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) परिदृश्य को बदलने वाले इस सेंटर की लागत 170 करोड़ रुपए है। यह जानकारी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने रविवार को दी।इस एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर के भूमि पूजन में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शामिल होंगे।
मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी में बताया गया कि यह एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर गया के खिजरसराय में बनाया जाएगा। कुल लागत में से लगभग 86 करोड़ रुपए सिविल निर्माण कार्यों के लिए और 84 करोड़ रुपए प्लांट और मशीनरी पर खर्च होंगे।
यह एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई 20 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। इसका निर्मित क्षेत्र लगभग 16,800 वर्ग मीटर होगा और इसमें एक उत्पादन ब्लॉक, प्रशिक्षण ब्लॉक, यूटिलिटी ब्लॉक, प्रशासनिक ब्लॉक, बहुउद्देशीय हॉल, छात्रावास और स्टाफ के लिए आवास होंगे। यह केंद्र सामान्य इंजीनियरिंग, हैवी इंजीनियरिंग और वस्त्र परीक्षण के प्रमुख क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करेगा ताकि इस क्षेत्र में एमएसएमई/उद्योगों की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
मंत्रालय ने आगे बताया कि यह सेंटर गयाजी, औरंगाबाद, नवादा, नालंदा, जहानाबाद और मुंगेर जिलों में एमएसएमई के लिए कार्य करेगा, उन्हें उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियों, उद्योग के लिए तैयार कार्यबल और आवश्यक तकनीकी और व्यावसायिक सलाहकार सेवाएं प्रदान करेगा ताकि वे विस्तार, नवाचार और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो सके ।
सरकार ने बताया कि एमएसएमई मंत्रालय अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देने और एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए देश भर में प्रौद्योगिकी केंद्रों और विस्तार केंद्रों का एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क का संचालन कर रहा है। वर्षों से, इन केंद्रों ने स्वदेशी क्षमताओं के विकास और आत्मनिर्भर भारत पहल को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये केंद्र एमएसएमई को बढ़ावा देने के अलावा भारत सरकार के आत्मनिर्भर, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण तंत्र के दृष्टिकोण के अनुरूप तकनीकी आत्मनिर्भरता और सतत औद्योगिक विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों को आगे बढ़ाते हैं।

