नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सभी मंत्रालयों और विभागों को आम लोगों के लिए 'ईज ऑफ लिविंग' और उद्योगों के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बेहतर बनाने वाले सुधारों की पहचान कर उन्हें लागू करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सरकार ने इन सुधारों की प्रगति की निगरानी के लिए एक समर्पित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी शुरू किया है।इस पहल के तहत सरकार ने पीएमरेफ पोर्टल पर नया 'रिफॉर्म' मॉड्यूल शुरू किया है, जो मंगलवार से काम करना शुरू कर चुका है।

यह पोर्टल एक केंद्रीय रिपॉजिटरी के रूप में कार्य करेगा, जहां सभी मंत्रालय और विभाग अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे नीतिगत सुधारों, प्रशासनिक उपायों और सुशासन से जुड़ी पहलों का विवरण अपलोड करेंगे।

सरकार के निर्देशों के अनुसार, सभी मंत्रालयों को ऐसे सुधारों की पहचान करनी होगी जो प्रक्रियाओं को सरल बनाएं, सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करें और देश में कारोबार के माहौल को अधिक अनुकूल बनाएं। ये सुधार हाई लेवल कमेटी (एचएलसी) की सिफारिशों, अनौपचारिक मंत्रिसमूह (आईजीओएम) के सुझावों या संबंधित मंत्रालयों द्वारा स्वयं तैयार किए गए प्रस्तावों पर आधारित हो सकते हैं।

केंद्र सरकार ने यह भी अनिवार्य किया है कि सभी मंत्रालय और विभाग अपनी सभी सुधार संबंधी पहलों का विवरण पीएमरेफ पोर्टल पर अपलोड करें और उनकी प्रगति को नियमित रूप से अपडेट करते रहें।

सुधारों की निरंतर निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक मंत्रालय को निर्देश दिया गया है कि वह इस सप्ताह से हर शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक पोर्टल पर अपनी साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट अपलोड करे।

सरकार का उद्देश्य इस पहल के जरिए सुधार प्रक्रिया को एक व्यवस्थित ढांचे के तहत संस्थागत रूप देना है, ताकि विभिन्न मंत्रालयों में लागू किए जा रहे नीतिगत और प्रशासनिक सुधारों की प्रभावी निगरानी और समीक्षा की जा सके। इससे मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और सुधार संबंधी उपायों के क्रियान्वयन में भी तेजी आएगी।

पीएमरेफ (प्रधानमंत्री रिफरेंस/रिफॉर्म्स) पोर्टल प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), केंद्रीय मंत्रालयों और सरकारी विभागों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक सुरक्षित डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म है।

यह नीतिगत सुधारों, प्रशासनिक पहलों और प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की निगरानी के साथ-साथ प्रगति जैसे प्लेटफॉर्म से भी जुड़ा हुआ है, जिससे विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय, जवाबदेही और परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सके। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों, निर्णयों और संदर्भों की भी निगरानी की जाती है।