इंदौर: 2019 का वो चर्चित शिवानी हत्याकांड आखिरकार न्याय के करीब पहुंच गया। जिला कोर्ट ने पत्नी की हत्या के मामले में बैंक अधिकारी अमितेष उर्फ शालू पटेरिया को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

अमितेष ने हत्या को छिपाने के लिए बेहद क्रूर और सुनियोजित साजिश रची थी। उसने राजस्थान के अलवर से 620 किलोमीटर दूर से ब्लैक डेजर्ट कोबरा 30 हजार रुपये में खरीदा, 11 दिन घर में छिपाकर रखा, फिर पत्नी शिवानी (35) का तकिए से गला घोंटकर हत्या कर दी। बाद में मरे हुए सांप के दांत पत्नी के हाथ में गड़ाकर मौत को सर्पदंश का रूप देने की कोशिश की।

हत्या का खौफनाक प्लान

1 दिसंबर 2019 को इंदौर के संचार नगर में यह घटना हुई। अमितेष ने पत्नी को अस्पताल पहुंचाकर डॉक्टरों और परिजनों को बताया कि सांप ने काट लिया है। घर में मरा हुआ कोबरा भी रख दिया गया था ताकि कहानी विश्वसनीय लगे।

लेकिन शिवानी के मायके वालों को शक हो गया। उनके चाचा प्रभात दीक्षित और पिता आनंद दीक्षित ने खुलकर हत्या का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि अमितेष तलाक चाहता था, दिल्ली में दूसरी महिला के साथ रहता था और दहेज के लिए भी प्रताड़ित करता था।

पोस्टमॉर्टम ने खोली पोल

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया। मेडिकल बोर्ड ने साफ कहा कि शिवानी की मौत सांप के जहर से नहीं, बल्कि दम घुटने (Asphyxia) से हुई थी। शव पर चोटों के निशान, बिस्तर की अस्त-व्यस्त स्थिति और तकिए के कवर पर लार जैसे धब्बे मिले।

फोरेंसिक जांच, मोबाइल कॉल रिकॉर्डिंग, गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने कोर्ट को विश्वास दिलाया कि अमितेष ने पहले से प्लान बनाकर हत्या की थी।

वन्यजीव अपराध भी साबित

साजिश में संरक्षित प्रजाति के कोबरा का इस्तेमाल करने पर अमितेष पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 51 भी लगी। कोर्ट ने कोबरा की हत्या को भी गंभीर अपराध माना और तीन साल की अतिरिक्त सजा दी।

परिवार का आरोप

शिवानी के पिता ने कहा था कि बेटी की मौत 10-12 घंटे पहले हो चुकी थी। शरीर का रंग पीला पड़ने के बजाय काला पड़ना चाहिए था अगर सांप का जहर होता। घटना के दिन अमितेष की बहन ऋचा बच्चों को लेकर मॉल चली गई थी, जो साजिश का हिस्सा लगता है।

कोर्ट ने 24 जून 2026 को फैसला सुनाते हुए अमितेष पटेरिया को उम्रकैद की सजा दी। उसके पिता ओमप्रकाश और बहन ऋचा पर भी हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप में केस चला था।

यह मामला दिखाता है कि अपराध कितना भी चतुराई से छिपाने की कोशिश की जाए, फोरेंसिक साक्ष्य और पुलिस की मेहनत अंततः सच्चाई सामने ला ही देते हैं।