Tuesday, February 10, 2026

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मध्य प्रदेशसागरपेरिनेटल चिकनपॉक्स से जूझ रहे नवजात को बीएमसी डॉक्टरों ने दी नई ज़िंदगी

पेरिनेटल चिकनपॉक्स से जूझ रहे नवजात को बीएमसी डॉक्टरों ने दी नई ज़िंदगी

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10 फ़रवरी 2026, 11:48 am IST
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सागर, जीशान खान। सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विशेषज्ञों ने पेरिनेटल चिकनपॉक्स जैसी अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा बीमारी से पीड़ित एक नवजात शिशु को सफल इलाज देकर मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया। जन्म के तुरंत बाद गंभीर हालत में पहुंचे इस बच्चे को निजी अस्पतालों में इलाज से मना कर दिया गया था, लेकिन बीएमसी की विशेषज्ञ टीम ने चुनौती स्वीकार करते हुए उसे नया जीवन दिया।


परिजनों के अनुसार, जन्म के कुछ ही समय बाद नवजात को सांस लेने में अत्यधिक परेशानी होने लगी। हालत बिगड़ने पर परिजन 2–3 निजी अस्पतालों और विशेषज्ञों के पास पहुंचे, जहां स्थिति को जटिल बताते हुए इलाज से इनकार कर दिया गया। अंतिम उम्मीद के रूप में बच्चे को बीएमसी सागर लाया गया।


बीएमसी पहुंचते ही नवजात की हालत बेहद नाजुक थी। वह स्वयं सांस नहीं ले पा रहा था। शिशु रोग विभाग की टीम ने बिना समय गंवाए बच्चे को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा और आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया। विशेषज्ञों के अनुसार, पेरिनेटल चिकनपॉक्स लाखों में किसी एक नवजात में पाया जाता है और इसकी मृत्यु दर 50 प्रतिशत तक मानी जाती है। इस संक्रमण में मस्तिष्क विकास रुकना, लिवर फेलियर, रक्त के थक्के, आंखों और सुनने की क्षमता पर स्थायी असर जैसी गंभीर जटिलताओं का खतरा रहता है।


यह बीमारी अत्यंत संक्रामक होने के कारण इलाज कर रहे डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के लिए भी जोखिमपूर्ण थी। इसके बावजूद शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष जैन के मार्गदर्शन में तथा डॉ. अजीत असाटी और डॉ. महेंद्र सिंह चौहान के नेतृत्व में टीम ने सभी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए उपचार शुरू किया। नवजात को पूरी तरह आइसोलेशन में रखकर चौबीसों घंटे निगरानी की गई।


इस जटिल उपचार में डॉ. रूपा अग्रवाल, डॉ. अंकित जैन, डॉ. अंकित जैन (सीनियर), डॉ. हर्ष पाटीदार, डॉ. पीयूष गुप्ता, डॉ. दिव्याश्री बघेल, डॉ. यश सोनी और डॉ. एस.के. पांडे सहित नर्सिंग स्टाफ का सराहनीय योगदान रहा। बीएमसी के मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने बताया कि डॉक्टरों की सतत निगरानी, समर्पण और टीमवर्क से नवजात की हालत में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। बच्चा अब बिना वेंटिलेटर के स्वयं सांस ले रहा है और सामान्य रूप से दूध भी पी रहा है। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर और अधीक्षक डॉ. राजेश जैन ने इस सफलता को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए पूरी टीम को बधाई दी है।

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