मुजफ्फरपुर। नीट परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर टेलीग्राम के माध्यम से अभ्यर्थियों और उनके परिजनों से ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ मुजफ्फरपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने इस मामले में चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इस कांड में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के नेटवर्क और ठगी के तौर-तरीकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग जुटाए हैं।

पुलिस के अनुसार, 2 मई को गुप्त सूचना के आधार पर सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के बालू घाट वार्ड संख्या-17 स्थित चॉकलेट फैक्ट्री के पास एक किराए के मकान में छापेमारी की गई थी। कार्रवाई के दौरान नीट परीक्षा का कथित प्रश्नपत्र तैयार कर टेलीग्राम के माध्यम से लोगों को ठगने के आरोप में मुजफ्फरपुर के ही रहने वाले मनीष झा को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से चार मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। इस मामले में सिकंदरपुर थाना में एक प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने विस्तृत जांच शुरू की थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्र के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक (नगर) की देखरेख तथा अपर पुलिस अधीक्षक नगर-1 के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम में जिला आसूचना इकाई और सिकंदरपुर थाना पुलिस को भी शामिल किया गया था।

पुलिस के एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि गठित टीम ने इसी क्रम में एक महत्वपूर्ण सूचना के आधार पर त्वरित छापेमारी कर गिरोह के चार अन्य सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हर्ष, अमन कुमार, कन्हैया कुमार उर्फ मानव और हर्ष कनोडिया के रूप में हुई है। सभी आरोपी मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले बताए गए हैं।

पुलिस से पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे टेलीग्राम प्लेटफॉर्म के जरिए नीट परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झांसा देकर अभ्यर्थियों और उनके परिजनों से पैसे वसूलते थे। आरोपी स्कैनर और अन्य ऑनलाइन भुगतान माध्यमों के जरिए रकम अपने बैंक खातों में मंगवाते थे।

ठगी से प्राप्त राशि बाद में गिरोह के मुख्य आरोपी मनीष झा तक पहुंचाई जाती थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों और ठगी के नेटवर्क की जांच जारी है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंक खातों के लेन-देन की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और ठगी की कुल रकम कितनी है।