नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स (सीडब्ल्यूजी) 2026 में एक और मेडल जीतना मुरली श्रीशंकर का सपना है। श्रीशंकर का कहना है कि वे 8.42 मीटर के मुश्किल लक्ष्य के पीछे भागने के बजाय प्रक्रिया पर ध्यान दे रहे हैं। भारतीय लॉन्ग जंपर का मानना है कि अगर सही समय पर सभी तकनीकी पहलू सही हो जाएं, तो दूरी अपने आप तय हो जाएगी।
कॉमनवेल्थ गेम्स का 23वां संस्करण 23 जुलाई से 2 अगस्त के बीच स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित होगा।
प्रतियोगिता में अपने अभियान की शुरुआत से पहले श्रीशंकर ने कहा, "मुझे पता है कि इसमें समय लगता है। मैं सिर्फ एक दूरी पर ध्यान देकर दूसरी चीजों से समझौता नहीं करना चाहता। मैं प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहता हूं और यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि टेक्निकल स्किल्स सही हों। अगर उचित समय पर तीनों पहलू एक साथ आ जाएं, तो बड़ी जंप मुमकिन है। मैं बस यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि मैं शारीरिक रूप से अच्छी शेप में रहूं।"
कॉमनवेल्थ गेम्स के सिल्वर मेडलिस्ट का मानना है कि 8.42 मीटर का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी जंप लगाना काफी हद तक हालात पर निर्भर करता है।
उन्होंने कहा, "कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में बेहतरीन जंप लगाना माहौल पर निर्भर करता है, क्योंकि 8.42 मीटर बहुत बड़ी जंप है। इतनी दूरी से शायद पिछले 50 ओलंपिक या वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल मिला होगा, इसलिए यह एक अहम आंकड़ा है। उस प्रदर्शन की बराबरी करने के लिए अच्छे हालात की जरूरत होगी। मुझे निश्चित तौर पर नहीं पता कि इस सीजन में ऐसा होगा या नहीं।"
27 वर्षीय श्रीशंकर को उम्मीद है कि जल्द ही बड़ी कामयाबी मिलेगी। उन्होंने कहा, "मुझे पूरा भरोसा है कि मैं जल्द ही वह जंप लगा लूंगा। मैं यह नहीं कह रहा कि ऐसा ग्लासगो (स्कॉटलैंड) या नागोया (जापान एशियन गेम्स 2026) में होगा, लेकिन मेरा मानना है कि वह जंप निश्चित रूप से मेरी पहुंच में है, क्योंकि मैंने पहले ही 8.38 मीटर की जंप लगाई है, जो नेशनल रिकॉर्ड के बहुत करीब है। चेन्नई में भी मैंने एक ऐसी जंप लगाई थी जो 8.42 मीटर पर रखे रेड कोन को बस छू गई थी, इसलिए मुझे पता है कि मैं उतनी दूरी तक जंप कर सकता हूं।"
श्रीशंकर ने कहा कि अभी उनका ध्यान अपने इवेंट के तकनीकी पहलुओं को बेहतर बनाने पर है। उन्होंने कहा, "मुझे बस हवा में अपनी बॉडी पोजिशन और लैंडिंग पर काम करने की जरूरत है। इंटर-स्टेट चैंपियनशिप और स्पला में ट्रेनिंग के दौरान मेरा दृष्टिकोण बहुत अच्छा रहा है। भुवनेश्वर से मुझे यही मुख्य सीख मिली। जब मैं इन तकनीकी चीजों को बेहतर बना लूंगा और उन्हें अपने असरदार दृष्टिकोण के साथ मिला लूंगा, तो मैं एक बड़ी जंप लगा पाऊंगा।"
केरल का यह एथलीट कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स मे सिल्वर मेडल अपने नाम कर चुका है। उनका उद्देश्य घुटने की चोट से वापसी करते हुए वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनाना है। इसी चोट के कारण वे पेरिस ओलंपिक्स में हिस्सा नहीं ले पाए थे।




