नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने गुणवत्ता और लेबलिंग मानकों का उल्लंघन करने के आरोप में देश में बिकने वाले कई प्रसिद्ध शराब ब्रांडों पर प्रतिबंध लगा दिया है। FSSAI ने शराब की उचित एजिंग प्रक्रिया अपनाने के बजाय कृत्रिम फ्लेवर (Artificial Flavors) का उपयोग करने और भ्रामक जानकारी देने के कारण यह सख्त कार्रवाई की है।
इस प्रतिबंध की चपेट में ओल्ड मोंक रम की तीन प्रमुख किस्में शामिल हैं। इनमें द लीजेंड, गोल्ड रिजर्व और XXX मैच्योर्ड रम शामिल हैं, जिनका उत्पादन मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर की खोपोली इकाई द्वारा किया जाता है।
प्रतिबंधित हुए अन्य प्रमुख शराब ब्रांड और निर्माण इकाइयां
FSSAI की कार्रवाई में ओल्ड मोंक के अलावा देश के कई अन्य लोकप्रिय ब्रांड और उनके निर्माण संयंत्र प्रभावित हुए हैं।
यूनाइटेड स्पिरिट्स की बारामती इकाई में निर्मित मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा इनब्रू बेवरेजेस द्वारा मध्य प्रदेश में उत्पादित बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की और ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम पर भी रोक लगा दी गई है।
मध्य प्रदेश स्थित एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रुअरीज द्वारा निर्मित सेंट्रल प्रोविंस व्हिस्की और मैकडॉवेल्स सेलिब्रेशन रम को भी प्रतिबंधित सूची में डाला गया है। वहीं, यूनाइटेड स्पिरिट्स के मध्य प्रदेश संयंत्र में बनने वाली एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की और रॉयल चैलेंज व्हिस्की भी FSSAI के मानकों पर खरी न उतरने के कारण प्रतिबंधित कर दी गई हैं।
भ्रामक लेबलिंग और नियमों के उल्लंघन पर आपत्ति
ओल्ड मोंक के मामले में FSSAI ने विशेष रूप से भ्रामक लेबलिंग प्रथाओं को उजागर किया है। ब्रांड अपनी XXX रम पर '7 साल पुरानी ब्लेंडेड' होने का दावा करता है, जबकि जांच में पाया गया कि उत्पाद का मुख्य घटक न्यूट्रल और अपरिपक्व स्पिरिट है तथा उसमें परिपक्व रम स्पिरिट की मात्रा 5 प्रतिशत से भी कम थी।
FSSAI के अल्कोहलिक बेवरेजेज दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी भी उत्पाद पर उम्र संबंधी दावे में मिश्रण में मौजूद सबसे कम उम्र की स्पिरिट की आयु को दर्शाना अनिवार्य है, जिसका यहां उल्लंघन किया गया।
कृत्रिम फ्लेवर के इस्तेमाल और आगे की कानूनी कार्रवाई पर रुख
नियामक ने स्पष्ट किया कि शराब में प्राकृतिक कॉफी या वेनिला फ्लेवर मिलाना स्वीकार्य प्रक्रिया है, लेकिन रम के रूप में बेचे जाने वाले पेय पदार्थ में कृत्रिम रूप से रम का ही फ्लेवर मिलाना उपभोक्ताओं को गुमराह करने जैसा है। FSSAI ने इसकी तुलना चाय में चाय का ही फ्लेवर मिलाने से की, जो उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता और परिपक्वता को गलत तरीके से प्रस्तुत करता है।
इस कड़ी में गोवा स्थित मंडेक्सी डिस्टिलरीज एंड ब्रुअरीज का निरीक्षण भी किया गया है और महाराष्ट्र के छह अन्य निर्माताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। दूसरी ओर, डियाजियो इंडिया ने FSSAI के इस आदेश को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया है।




