इंदौर। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'NEET-UG 2026' के घोषित परिणामों को लेकर एक नया और गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के एक आदिवासी छात्र ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) पर उसके अंकों में 241 नंबरों की भारी हेराफेरी का सनसनीखेज आरोप लगाया है। छात्र का दावा है कि एनटीए द्वारा जारी आधिकारिक ओएमआर (OMR) शीट और उत्तर कुंजी (Answer Key) के मिलान के अनुसार उसके कुल 305 अंक बनते हैं, जबकि घोषित परिणाम में उसे महज 64 अंक ही दिए गए हैं। अंकों में इस विशाल और संदिग्ध अंतर को लेकर छात्र ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में न केवल अंक विसंगति, बल्कि एनटीए की वैधानिक स्थिति पर भी सीधे सवाल दागे गए हैं।


ओएमआर में 305 अंक बनने का दावा, रिजल्ट में केवल 64 अंक दर्शाए

याचिकाकर्ता छात्र लोकेंद्र सिंह खड़िया, निवासी झाबुआ, ने अपने अधिवक्ता अभिनव धनोडकर के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड की गई ओएमआर शीट और मॉडल उत्तर कुंजी का जब मिलान किया गया, तो उसके भौतिकी (Physics) में 104 अंक, रसायन विज्ञान (Chemistry) में 125 अंक और जीव विज्ञान (Biology) में 76 अंक यानी कुल मिलाकर 305 अंक बनते हैं। इसके बावजूद एनटीए द्वारा 16 जुलाई 2026 को जारी किए गए आधिकारिक परिणाम में छात्र को केवल 64 अंक दिए गए, जिससे उसका पूरा भविष्य अधर में लटक गया है।


एक ही पोर्टल पर दो अलग-अलग OMR शीट मिलने का आरोप

याचिका में एनटीए के तकनीकी तंत्र पर बेहद संगीन आरोप लगाए गए हैं। छात्र के अनुसार, जब उसने 14 जुलाई को एनटीए के आधिकारिक पोर्टल पर अपनी ओएमआर शीट देखने के लिए पहली बार लॉग-इन किया, तो उसे दिखाई गई ओएमआर में भौतिकी और रसायन विज्ञान विषय के अधिकांश उत्तर वाले गोले (ओवल) पूरी तरह रिक्त दिखाई दे रहे थे। हालांकि, कुछ समय बाद जब छात्र ने पोर्टल पर दोबारा लॉग-इन किया, तो उसे एक दूसरी ओएमआर शीट उपलब्ध कराई गई, जिसमें उसके द्वारा दर्ज किए गए उत्तर साफ दिखाई दे रहे थे। छात्र का आरोप है कि इसी तकनीकी गड़बड़ी और लापरवाही के कारण उसकी अंक गणना प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई है।


संसद से पारित संस्था नहीं NTA, वैधानिक दर्जे को भी दी चुनौती

इस याचिका की सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल एक छात्र की अंक विसंगति ही नहीं उठाई गई है, बल्कि पूरे देश में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं आयोजित कराने वाली संस्था एनटीए (NTA) के गठन और उसके कानूनी अस्तित्व को ही चुनौती दे दी गई है। याचिका में कहा गया है कि एनटीए भारतीय संसद द्वारा किसी कानून के तहत स्थापित कोई स्वायत्त या वैधानिक (Statutory) संस्था नहीं है। यह महज 'सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860' के तहत रजिस्टर्ड एक साधारण सोसायटी मात्र है। ऐसे में देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इतनी बड़ी राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं के संचालन के लिए उसकी वैधानिक स्थिति की विस्तृत न्यायिक समीक्षा होना बेहद जरूरी है।


ई-मेल से शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं, छात्र ने मांगी स्वतंत्र जांच

छात्र लोकेंद्र सिंह का कहना है कि परिणाम में इतनी बड़ी विसंगति सामने आने के बाद उसने तुरंत एनटीए को ईमेल के माध्यम से प्रमाणों के साथ आधिकारिक शिकायत भेजी थी। लेकिन कई दिनों तक इंतजार करने के बाद भी जब एनटीए की ओर से कोई समाधान या जवाब नहीं मिला, तब विवश होकर उसे न्याय के लिए हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।


याचिका के जरिए छात्र ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि एनटीए को अदालत में उसकी मूल ओएमआर शीट, मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया और अंक गणना का निष्पक्ष व स्वतंत्र सत्यापन कराने का सख्त निर्देश दिया जाए। साथ ही, आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर उसके परिणाम में तत्काल आवश्यक संशोधन कराया जाए। याचिकाकर्ता ने साफ किया है कि वह परीक्षा के पुनर्मूल्यांकन की मांग नहीं कर रहा, बल्कि एनटीए के आधिकारिक रिकॉर्ड में ही मौजूद इस भारी विसंगति को दूर कराने की गुहार लगा रहा है।