इंदौर। इंदौर पुलिस में चर्चित 'पॉकेट गवाह' (स्टॉक विटनेस) मामले में विभागीय जांच पूरी होने के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने तत्कालीन खजराना टीआई और वर्तमान साइबर थाना प्रभारी दिनेश वर्मा को पद से डिमोट (पदावनत) करते हुए इंस्पेक्टर से सब-इंस्पेक्टर (एसआई) बना दिया है।
700 से ज्यादा मामलों में एक ही गवाहों का इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि जुआ, सट्टा, आबकारी और आर्म्स एक्ट से जुड़े सैकड़ों प्रकरणों में दो व्यक्तियों—इरशाद और नवीन—को बार-बार सरकारी गवाह बनाया जाता था: आरोपी को सजा दिलाने और मुकदमों को मजबूत करने के लिए 700 से अधिक मामलों में इन्हीं दो लोगों का इस्तेमाल किया गया। बताया जा रहा है कि जिन प्रकरणों में इन गवाहों का इस्तेमाल हुआ, उनमें से करीब 80 प्रतिशत मामलों में आरोपियों को सजा हो चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद खुला मामला
यह पूरा प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में उठे 'स्टॉक विटनेस' विवाद के बाद गरमाया: चंदन नगर थाने के तत्कालीन टीआई इंद्रमणि पटेल पर एक मामले में फर्जी केस और पॉकेट गवाहों का आरोप लगा, जो मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। शीर्ष अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद मध्य प्रदेश भर में ऐसे मामलों की जांच के निर्देश दिए गए। इसी कड़ी में तत्कालीन एसीपी जयंत राठौर द्वारा तैयार की गई जांच रिपोर्ट में दिनेश वर्मा का नाम सामने आया। विभागीय जांच के दौरान दिनेश वर्मा ने पुलिस के उस हलफनामे का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि गवाह न मिलने पर पुलिस को ऐसे गवाह तैयार करने पड़ते हैं। हालांकि, जांच में उनके इस तर्क को अस्वीकार कर दिया गया।
आगे का रास्ता
विभागीय स्तर पर डिमोशन की कार्रवाई के बाद दिनेश वर्मा के पास वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष इस फैसले के खिलाफ अपील करने का विकल्प मौजूद है। यदि वहां से राहत नहीं मिलती है, तो वे अदालत का रुख भी कर सकते हैं।




