हैदराबाद। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आंध्र प्रदेश के शराब परिवहन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए हैदराबाद के पांच ठिकानों पर छापेमारी की है। ईडी ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 11 जून को की।

जांच एजेंसी ने केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी, डोंटिरेड्डी वासुदेव रेड्डी, विजया नरसिम्हा रेड्डी, वल्लू संदीप, करुमुरी नागेश्वर राव और करुमुरी सुनील कुमार से जुड़े परिसरों की तलाशी ली। इस दौरान एक लग्जरी कार, लगभग 94.5 लाख रुपए मूल्य की महंगी घड़ियां और बड़ी मात्रा में कैश बरामद किया गया। इसके अलावा संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, संदिग्ध संयुक्त उद्यम समझौते तथा नकद लेनदेन से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।

ईडी ने यह जांच आंध्र प्रदेश सीआईडी द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर राज्य सरकार के अतिरिक्त सचिव (सतर्कता) की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थी। मामले में करीब 195.33 करोड़ रुपए की अनियमितताओं की जांच की जा रही है।

ईडी की जांच में सामने आया है कि आंध्र प्रदेश स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के शराब परिवहन टेंडरों की शर्तों में कथित तौर पर बदलाव कर कुछ चुनिंदा कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया। जांच के अनुसार मेसर्स सिग्मा सप्लाई चेन सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और बाद में मेसर्स प्रसाद ट्रांसपोर्ट्स को ठेके दिलाने के लिए टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर की गई। एजेंसी का आरोप है कि ये कंपनियां केवल नाम मात्र की थीं, जबकि उनका वास्तविक संचालन और वित्तीय नियंत्रण अन्य लोगों के हाथों में था।

जांच में यह भी पता चला है कि शराब परिवहन व्यवस्था के माध्यम से अवैध लाभ कमाने के लिए एक संगठित नेटवर्क तैयार किया गया था। ईडी के अनुसार, कुछ प्रभावशाली लोगों और तत्कालीन अधिकारियों ने मिलकर परिवहन दरों को कृत्रिम रूप से बढ़ाया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा और निजी लाभ अर्जित किया गया। आरोप है कि पहले जहां परिवहन दर औसतन 19.68 रुपए प्रति कार्टन थी, उसे बढ़ाकर लगभग 35.57 रुपए प्रति कार्टन कर दिया गया।

ईडी का दावा है कि इस पूरे मामले में केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी प्रमुख साजिशकर्ता के रूप में सामने आए हैं। वहीं, एपीएसबीसीएल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक डोंटिरेड्डी वासुदेव रेड्डी पर भी अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग कर कथित अनियमितताओं को बढ़ावा देने का आरोप है।

ईडी ने कहा है कि मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं के विभिन्न पहलुओं की जांच जारी है तथा आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना है।