कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में भारत के उच्चायुक्त (एचसीआई) और ऑस्ट्रेलिया के स्किल्स और ट्रेनिंग मंत्री ने सोमवार को मुलाकात की और दोनों देशों के बीच चल रहे स्किल्स सहयोग पर चर्चा की।

ऑस्ट्रेलिया में भारत के उच्चायोग ने 'एक्‍स' पर लिखा, “भारत के उच्चायुक्त नागेश सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के स्किल्स और ट्रेनिंग मंत्री एंड्रयू जाइल्स से शिष्टाचार मुलाकात की।”

हाई कमीशन ने बताया, “दोनों ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चल रहे स्किल्स सहयोग पर चर्चा की, जो दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी का एक अहम हिस्सा है। साथ ही इस सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर भी बात हुई, ताकि दोनों देशों को इसका फायदा मिल सके।”

इसी दिन, उच्चायुक्त ने विक्टोरिया की प्रीमियर जेसिंटा एलन एमपी से भी मुलाकात की और भारत-विक्टोरिया के संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की।

भारत के उच्चायोग ने लिखा, “भारत के उच्चायुक्त नागेश सिंह की विक्टोरिया की जेसिंटा एलन एमपी के साथ एक गर्मजोशी भरी और उपयोगी मुलाकात हुई। बातचीत में व्यापार, शिक्षा, इनोवेशन, स्किल्स, संस्कृति और प्रवासी भारतीयों से जुड़े मुद्दों पर भारत-विक्टोरिया संबंधों को और गहरा करने पर चर्चा हुई।”

उच्चायोग ने कहा, “भारत और विक्टोरिया के बीच एक मजबूत साझेदारी है, जिसकी नींव जीवंत भारतीय प्रवासी समुदाय और लगातार बढ़ते संस्थागत संबंधों पर टिकी है।”

पिछले दिसंबर में भारत और ऑस्ट्रेलिया ने कौशल विकास, कामकाजी लोगों की आवाजाही और तेजी से बढ़ती स्पोर्ट्स इकॉनमी में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक अहम द्विपक्षीय बैठक की थी। यह बैठक नई दिल्ली में थर्ड ऑस्ट्रेलिया-इंडिया एजुकेशन एंड स्किल्स काउंसिल (एआईईएससी) के तहत हुई थी।

इस बैठक की सह-अध्यक्षता कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी और ऑस्ट्रेलिया के मंत्री एंड्रयू जाइल्स ने की थी।

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और इस बढ़ते सहयोग को व्यवस्थित तरीकों से आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया।

दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि म्यूचुअल रिकॉग्निशन ऑफ क्वालिफिकेशंस (एमआरक्‍यू) व्यवस्था को जल्दी लागू किया जाए और ऐसे ब्रिज कोर्स तैयार किए जाएं, जिनसे लोगों के कौशल को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार ढाला जा सके और कामकाजी लोगों की आवाजाही आसान हो।

खास तौर पर इस बात पर जोर दिया गया कि उन्नत निर्माण जैसे क्षेत्रों में कुशल श्रमिकों को तैयार किया जाए, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में बड़े खेल आयोजनों से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित किया जा रहा है।