चमोली। उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा और दान राशि में कथित हेराफेरी मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। दावा है कि जांच के लिए अहम सबूत मानी जा रही 32 दिन की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग गायब है।
बद्रीनाथ धाम के दान प्रकरण में पहले 45 दिन की फुटेज सुरक्षित होने का दावा किया गया था। सूत्रों ने बताया है कि अभी 32 दिनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग जांच टीम को नहीं मिली। सूत्रों ने यह भी कहा है कि डिलीट हुई फुटेज को वापस लाने के लिए तकनीकी टीमें जुटी हैं।
इससे पहले, एसआईटी की रिपोर्ट में बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे और दान में कई बार चोरी होने का दावा किया गया। एसआईटी ने पिछले दिनों अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट सीईओ को सौंपी। सूत्रों ने बताया कि चार सदस्यीय जांच टीम ने 18 पन्नों की रिपोर्ट में विस्तार से पूरी घटना और अपनी जांच का ब्योरा दिया।
सूत्रों के अनुसार, जांच टीम को घटना के दिन 2 जुलाई से मात्र 14 दिन पहले तक के ही फुटेज मिल पाए। पूर्व में लगे सीसीटीवी कैमरे से अधिक अच्छी क्वालिटी के न होने के कारण इनकी स्टोरेज क्षमता मात्र 15 दिनों की ही है। 2 जुलाई को कथित आरोपी पैसों में हेराफेरी करते हुए दिखाई दे रहा है। 14 दिन पूर्व के कुछ फुटेज के कई भाग भी जांच टीम को महत्वपूर्ण लगे हैं।
बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे में कथित तौर पर हेराफेरी का मामला एक-दो जुलाई को सामने आया था। शुरुआती जांच में कथित तौर पर ऐसे सबूत मिले, जिनसे पता चला कि श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल ने बिना इजाजत मंदिर का फंड निकाला था।
श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने 7 जुलाई को अनुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से बड़ी कार्रवाई की। प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। इसके साथ ही, समिति ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पहले ही चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था।




