बीना (सागर), बृजपाल सिंह राजपूत। रेलवे स्टेशन बीना पर उस समय हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई, जब पुलिस और प्रशासन को ट्रेन के जरिए बड़ी संख्या में बच्चों को बाल मजदूरी के लिए ले जाए जाने की गुप्त सूचना मिली। कंट्रोल रूम से मिली इस 'अलर्ट' कॉल के बाद जीआरपी, आरपीएफ और समाजसेवी संस्थाओं ने आनन-फानन में एक संयुक्त मोर्चा संभाला और अंत्योदय एक्सप्रेस को घेरकर सर्च ऑपरेशन चलाया। हालांकि, घंटों चली मशक्कत के बाद भी पुलिस के हाथ कोई संदिग्ध बच्चा या गिरोह नहीं लगा और टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा।


मामले की शुरुआत तब हुई जब सीडब्ल्यूसी (CWC) और रेलवे कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि अंत्योदय एक्सप्रेस में बड़ी संख्या में नाबालिग बच्चों को अवैध रूप से मजदूरी के लिए बाहर ले जाया जा रहा है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए बीना स्टेशन पर पहले से ही जीआरपी थाना प्रभारी, आरपीएफ के जवान और चाइल्ड लाइन सहित समाजसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ता मुस्तैद हो गए। जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आकर रुकी, पूरी टीम ने मोर्चा संभाल लिया।


ट्रेन के रुकते ही सुरक्षा बलों और समाजसेवियों की संयुक्त टीम ने अंत्योदय एक्सप्रेस के हर कोच में प्रवेश किया। जनरल बोगियों से लेकर स्लीपर क्लास तक, एक-एक बर्थ की बारीकी से जांच की गई। संदिग्ध दिखने वाले समूहों और बच्चों के साथ सफर कर रहे यात्रियों से पूछताछ की गई। इस अचानक हुई कार्रवाई से यात्रियों के बीच भी कौतूहल और घबराहट का माहौल देखा गया। स्टेशन मास्टर खुद पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रहे थे।


पुलिस और समाजसेवी संस्थाओं की टीमों ने ट्रेन के शौचालय से लेकर दरवाजों के पास तक सघन तलाशी ली। टीम का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों को रेस्क्यू करना था जिन्हें कथित तौर पर काम के बहाने तस्करी कर ले जाया जा रहा था। लेकिन काफी देर तक चले इस सर्च ऑपरेशन के बाद भी ट्रेन के भीतर एक भी ऐसा बच्चा नहीं मिला जिसे 'बाल मजदूर' की श्रेणी में रखा जा सके या जिसके पास वैध दस्तावेज न हों।


जांच में कुछ भी संदिग्ध न मिलने पर अंततः जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त टीम को खाली हाथ ही वापस आना पड़ा। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि या तो सूचना गलत थी या फिर संदिग्ध लोग पहले ही किसी अन्य स्टेशन पर उतर गए होंगे। पूरी संतुष्टि करने के बाद स्टेशन मास्टर ने ट्रेन को आगे के सफर के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। हालांकि, इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि बाल तस्करी को लेकर रेलवे प्रशासन और स्थानीय पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है।