कोलकाता, रोहित पाठक। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में चल रही बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की श्री हनुमंत कथा के तीसरे दिन आध्यात्मिक उल्लास उस समय चरम पर पहुंच गया, जब देश की प्रख्यात कथावाचिका और प्रेरक वक्ता जया किशोरी विशेष रूप से कथा स्थल पर पहुंचीं।
जया किशोरी ने व्यासपीठ पर विराजमान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से शिष्टाचार भेंट की और कथा मंडप में बैठकर एकाग्रचित्त होकर हनुमंत चरित्र और अमृतमयी कथा का रसपान किया। सनातन संस्कृति के दो प्रमुख युवा आध्यात्मिक चेहरों को एक साथ देखकर पंडाल में मौजूद हजारों श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा परिसर 'जय श्री राम' व 'जय बजरंगबली' के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो गया।
केंद्रीय मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने टेका मत्था, भेंट किए त्रिशूल व भगवद्गीता
कथा के तीसरे दिन केंद्रीय मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार भी आशीर्वाद लेने पहुंचे। उन्होंने व्यासपीठ के समक्ष नतमस्तक होकर पूज्य महाराजश्री का वंदन किया और उन्हें आस्था के प्रतीक के रूप में त्रिशूल तथा श्रीमद्भगवद्गीता का भव्य ग्रंथ सप्रेम भेंट किया। केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि बागेश्वर सरकार के पावन सानिध्य और कथा श्रवण से उन्हें अपार शांति, आत्मिक संबल और ऊर्जा की अनुभूति हुई है। उन्होंने कथा स्थल पर उपस्थित जनसमूह के बीच देश की समृद्धि, शांति और जनकल्याण की प्रार्थना की।
आस्था, सांस्कृतिक चेतना और एकता का केंद्र बना कोलकाता का आयोजन
कोलकाता में आयोजित यह हनुमंत कथा महज एक धार्मिक अनुष्ठान न रहकर सनातन एकता और सांस्कृतिक गौरव का विराट मंच बन चुकी है। लाखों की संख्या में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ और सुप्रसिद्ध कथावाचिका जया किशोरी सहित शीर्ष राजनेताओं व संतों की उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया है। कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के ओजस्वी विचारों और प्रभु भक्ति के संदेश ने महानगर के जनमानस को भक्ति-रस से सराबोर कर दिया है।




