छतरपुर, संजय अवस्थी। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में अतिथि शिक्षकों के अनुभव सत्यापन को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की कथित सुस्ती और उदासीनता के कारण हजारों अतिथि शिक्षकों का अनुभव सत्यापन अब तक लंबित है, जबकि आवेदन प्रक्रिया की अंतिम तिथि समाप्त होने में महज दो-तीन दिन का समय शेष बचा है। वेरिफिकेशन न होने से भड़के नाराज अतिथि शिक्षकों ने सोमवार को जिला पंचायत सभाकक्ष के बाहर एकत्रित होकर शिक्षा विभाग की लापरवाही के खिलाफ जमकर नारेबाजी और उग्र प्रदर्शन किया। जिस समय यह प्रदर्शन हुआ, उस दौरान सभाकक्ष के भीतर टीएल बैठक चल रही थी।


हंगामा बढ़ता देख एसडीएम प्रशांत अग्रवाल ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारी शिक्षकों से चर्चा की। उन्होंने अतिथि शिक्षकों की जायज मांगों को सुना और उचित प्रशासनिक कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया, जिसके बाद शिक्षक शांत हुए। मामले की गंभीरता को बताते हुए अतिथि शिक्षक शिवा विश्वकर्मा ने कहा कि अनुभव सत्यापन की अंतिम तारीख 28 मई तय की गई है। इसके ठीक पहले शनिवार और रविवार को शासकीय अवकाश होने के कारण दफ्तर बंद रहे और अब अंतिम दिनों के बीच में भी छुट्टियां आ रही हैं। ऐसे में इतने कम समय में हजारों शिक्षकों का वेरिफिकेशन कैसे संभव होगा? अतिथि शिक्षकों का साफ कहना है कि यदि समय रहते उनका सत्यापन कार्य पूरा नहीं हुआ, तो उनके बरसों के अनुभव के अंक पोर्टल पर दर्ज नहीं हो पाएंगे, जिससे वे आगामी चयन प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर हो जाएंगे। विभाग की इस लापरवाही ने जिले भर के अतिथि शिक्षकों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं।


प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे कई दिनों से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन बाबू और अधिकारियों की उदासीनता के चलते उनकी फाइलों को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। विभागीय लेती-देती और सुस्ती के कारण आज हजारों शिक्षित परिवारों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ गई है। विभिन्न शिक्षक संगठनों ने जिला प्रशासन को दोटूक चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर लंबित अनुभव सत्यापन का कार्य युद्धस्तर पर पूरा नहीं कराया गया, तो पूरे जिले में एक बड़ा और उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह शिक्षा विभाग की होगी। पीड़ित अतिथि शिक्षकों ने प्रदेश शासन और वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सत्यापन की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाया जाए और सभी लंबित मामलों का तत्काल निराकरण किया जाए। गौरतलब है कि छतरपुर जिले में शिक्षा विभाग और अतिथि शिक्षक भर्ती को लेकर पहले भी कई तरह के विवाद और अनियमितताओं के मामले सुर्खियां बटोर चुके हैं।