टीकमगढ़, मोहसिन अहमद। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद टीकमगढ़ जिले में इसका कोई विशेष असर दिखाई नहीं दे रहा है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बिना मान्यता और चिकित्सकीय डिग्री के कथित डॉक्टर खुलेआम मरीजों का इलाज कर रहे हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का लाभ उठाकर ये लोग ग्रामीणों की मजबूरी को अपना व्यवसाय बना रहे हैं।


जिला मुख्यालय के समीप स्थित पठा गांव में एक बंगाली चिकित्सक निरंजन विश्वास द्वारा पिछले 32 वर्षों से क्लीनिक संचालित किए जाने का मामला चर्चा में है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां उल्टी, दस्त, खांसी, बुखार सहित विभिन्न बीमारियों का इलाज किया जाता है तथा मरीजों को दवाइयां और इंजेक्शन भी दिए जाते हैं। लोगों का कहना है कि संबंधित व्यक्ति की प्रशासनिक तंत्र में अच्छी पकड़ होने के कारण उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती।


ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जिले में झोलाछाप डॉक्टरों के गलत इलाज के कारण पिछले एक वर्ष के दौरान लगभग आधा दर्जन लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे कथित झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर 32 वर्षों से संचालित इस क्लीनिक पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि किसी मरीज की जान को नुकसान पहुंचता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी—कथित झोलाछाप डॉक्टरों की या फिर मौन बैठे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की।