छतरपुर, विनोद मिश्रा। जनपद पंचायत छतरपुर में शौचालय निर्माण के नाम पर रिश्वत लेने के मामले में सजा सुनाए जाने के बाद पूर्व ब्लॉक समन्वयक डॉ. नीलम तिवारी ने मीडिया के सामने आकर सनसनीखेज खुलासे किए हैं। विशेष न्यायालय द्वारा तीन वर्ष के कारावास और 3000 के जुर्माने की सजा सुनाए जाने के बाद उन्होंने जनपद पंचायत के समूचे तंत्र पर सवाल खड़े करते हुए दावा किया है कि विभाग में चल रहे बड़े फर्जीवाड़े और अपात्रों के भुगतानों का विरोध करने के कारण उन्हें एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत मोहरा बनाकर फंसाया गया था। इस मामले की गूंज मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई तक भी पहुंच गई, जहां पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई गई है।
डॉ. नीलम तिवारी के अनुसार, 18 फरवरी 2020 को लोकायुक्त पुलिस ने जनपद कार्यालय से उन्हें 6500 के कथित लेनदेन के मामले में पकड़ा था। 17 सितंबर को न्यायालय के आए फैसले का सम्मान करते हुए उन्होंने कहा कि जब सोशल मीडिया पर एआई के जरिए उनके खिलाफ दुष्प्रचार शुरू हुआ, तो उन्हें सच उजागर करने सामने आना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि दिसंबर 2019 में ओडीएफ फेस-टू के सर्वे के दौरान उन्होंने पूर्व से निर्मित शौचालयों पर दोबारा भुगतान कराने और फर्जी नामों की सूची का कड़ा विरोध किया था। डॉ. तिवारी ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि तत्कालीन रोजगार सहायक जितेंद्र सिंह द्वारा स्वयं और अपने परिजनों के नाम पर शौचालय की राशि निकालने और फर्जी भुगतान की शिकायत उन्होंने तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ से की थी। 17 जनवरी 2020 को दी गई इसी लिखित शिकायत और राशि वसूली की प्रक्रिया शुरू कराने के कारण एक संगठित गिरोह उनके खिलाफ सक्रिय हुआ और महज एक महीने बाद उन्हें ट्रैप करा दिया गया।
अपने दावों के समर्थन में डॉ. तिवारी ने ग्राम ढिलापुर में आवास और शौचालय योजना में हुए भ्रष्टाचार का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जांच के उपरांत संबंधित रोजगार सहायक को दोषी पाते हुए पंचायत राज अधिनियम की धारा 92 के तहत कार्रवाई की गई थी। शौचालय मद के 24 हजार जमा कराए गए और एफआईआर के आदेश भी हुए, लेकिन रसूखदारों के दबाव में अपेक्षित कानूनी कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और पूरे मामले में उन्हें ही बलि का बकरा बना दिया गया।
डॉ. नीलम तिवारी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि जनपद पंचायत अंतर्गत आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन के शौचालय और मनरेगा के मास्टर रोल की ईमानदारी से जांच कराई जाए, तो जनपद के कई बड़े चेहरों के काले चिट्ठे उजागर होंगे। उन्होंने दावा किया कि ढीलापुर, मोरवा, सरानी, बगौता, देरी, धोरी, पनोठा और कलानी जैसी कई ग्राम पंचायतों में बड़े स्तर पर शासकीय धन की बंदरबांट हुई है। उनके पास इस फर्जीवाड़े से जुड़े पुख्ता साक्ष्य व दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें वे बहुत जल्द उच्च अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर पूरे सिंडिकेट की जांच की मांग करेंगी।
विवाद गहराने के बाद मंगलवार को आयोजित जिला स्तरीय जनसुनवाई में ऋषि रिछारिया द्वारा इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में डॉ. नीलम तिवारी द्वारा लगाए गए तमाम आरोपों, पूर्व में रोके गए फर्जी भुगतानों और संबंधित रोजगार सहायकों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है। अब बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या जिला प्रशासन डॉ. नीलम तिवारी द्वारा उजागर किए गए दस्तावेजों और पंचायतों में हुए कथित भुगतानों का भौतिक सत्यापन कराएगा, या फिर फाइलों में दबा यह कथित भ्रष्टाचार यूं ही दफन रह जाएगा?




