शिमला। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू के मुख्यालय ढालपुर मैदान में भगवान रघुनाथ की भव्य शोभायात्रा के साथ-साथ 7 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव की शुरुआत हो गई है। ऐसे में अब 7 दिनों तक भगवान रघुनाथ ढालपुर में अपने अस्थाई शिविर में विराजमान रहेंगे और लंका दहन के बाद वापस अपने मंदिर लौट जाएंगे।इसके अलावा, शाम के समय कला केंद्र में राज्यपाल के द्वारा सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ किया जाएगा। बुधवार को आयोजित भगवान की रथ यात्रा में हजारों लोगों की भीड़ ने भाग लिया और जय श्री राम के नारे लगाते हुए भगवान रघुनाथ का रथ खींचा। इस दौरान घाटी के विभिन्न इलाकों से आए देवी-देवताओं ने भी रथ यात्रा में शिरकत की।

बुधवार को भगवान रघुनाथ दोपहर 4 बजे के करीब रघुनाथपुर से ढालपुर के रथ मैदान पहुंचे और अपने रथ में सवार हुए। इस दौरान भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह और राज परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे। ढोल-नगाड़ों की थाप पर भगवान रघुनाथ के साथ देवी-देवता भी इस दौरान मौजूद रहे।

इस दौरान भगवान रघुनाथ के पुजारी ने देव परंपरा का पालन किया। भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा में माता हिडिंबा, देवता बिजली महादेव, देवता आदि ब्रह्म, देवता कार्तिक स्वामी, देवता नाग धूमल, देवता वीर नाथ, देवता बीर केला, माता गायत्री, माता त्रिपुर सुंदरी, माता काली ओडी और अन्य दर्जनों देवी-देवता शामिल हुए।

रथ यात्रा के दौरान हजारों लोगों ने जय श्रीराम के नारों के साथ भगवान रघुनाथ के रथ को खींचा। रथ मैदान से भगवान रघुनाथ के अस्थाई शिविर तक रथ को ले जाया गया, जहां हजारों लोगों ने भगवान रघुनाथ के रथ के सामने नतमस्तक होकर आशीर्वाद लिया। ढालपुर मैदान में रथ यात्रा के लिए हजारों लोगों की भीड़ भगवान रघुनाथ के दर्शनों के लिए उमड़ी।

भगवान रघुनाथ के कारदार दानवेंद्र सिंह ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव में भगवान रघुनाथ 7 दिनों तक अपने अस्थाई शिविर में रहेंगे और भगवान रघुनाथ की यहां पर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। श्रद्धालु यहां पर भगवान रघुनाथ के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। लंका दहन के बाद भगवान रघुनाथ वापस अपने मंदिर की ओर लौट जाएंगे।

वहीं, राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने बताया कि दशहरा उत्सव देवी-देवताओं से जुड़ी हुई प्राचीन परंपरा है और भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा में भाग लेने के लिए हजारों लोग इसमें शामिल होते हैं। ऐसे में इस वर्ष उन्होंने भी भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा देखी है। इस भव्य यात्रा को देखकर ऐसा लगता है कि देवी-देवता स्वर्ग से सीधे धरती पर उतर आए हों और इस नजारे को देखने के लिए देश ही नहीं, बल्कि विदेश से भी लोग ढालपुर पहुंचे हैं।

लखनऊ से आए सैलानी मोहित का कहना है कि उन्होंने कुल्लू दशहरा के बारे में पहले भी काफी सुना था। ऐसे में इस वर्ष उन्हें दशहरा उत्सव में भाग लेने का मौका मिला है। यहां पर हजारों लोगों की भीड़ देवी-देवताओं के साथ चलती है और यह नजारा काफी मनमोहक है।

मुंबई से आई सैलानी जेनिफर ने बताया कि भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा देखकर वह काफी भावुक हो गई थी। ऐसा नजारा उन्होंने अपनी जिंदगी में पहली बार देखा है। यहां पर उन्हें हिमालय में रहने वाले सभी देवी-देवताओं के दर्शन करने का भी मौका मिला और अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के बारे में जो बातें उन्होंने सुनी थीं, वह सब आज अपनी आंखों से देख पाई हैं।

फ्रांस से आए सैलानी एलेक्स ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव की परंपराएं अपने आप में अनूठी हैं। बुधवार को भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा देखने का उन्हें भी मौका मिला और यहां की देव संस्कृति के बारे में भी उन्हें काफी जानकारी मिली है। ऐसे में आने वाले दिनों में वह ढालपुर में अन्य देवी-देवताओं के शिविर में जाकर भी उनके दर्शन करेंगे।