नई दिल्ली, 17 अप्रैल । 18 अप्रैल सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि उससे कहीं ज्यादा है। इसी दिन हर साल विश्व विरासत दिवस मनाया जाता है, ताकि लोग अपनी जड़ों से जुड़ें और समझें कि हमारे आसपास मौजूद धरोहरें कितनी अनमोल हैं। ये धरोहरें सिर्फ पुरानी इमारतें नहीं हैं, बल्कि हमारे पूर्वजों की मेहनत, कला, परंपरा और सोच का जीवंत उदाहरण हैं।विश्व विरासत दिवस की शुरुआत 1982 में इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स (आईकॉमोस) ने की थी। बाद में 1983 में यूनेस्को ने इसे आधिकारिक मान्यता दी, तब से लेकर आज तक यह दिन दुनियाभर में लोगों को अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति जागरूक करने के लिए मनाया जाता है।

विश्व धरोहर का मतलब उन खास जगहों से है जिन्हें यूनेस्को ने उनके अनोखे सांस्कृतिक या प्राकृतिक महत्व के कारण चुना है। ये स्थल पूरी मानवता की साझा संपत्ति माने जाते हैं। भारत जैसे देश में तो धरोहरों की कोई कमी ही नहीं है। ताज महल की खूबसूरती, अजंता और एलोरा की गुफाओं की कला, खजुराहो के मंदिरों की नक्काशी और कुतुबमीनार की भव्यता ये सब हमारी समृद्ध विरासत की पहचान हैं।

आज के समय में ये धरोहरें कई चुनौतियों का सामना कर रही हैं। तेजी से बढ़ता शहरीकरण, प्रदूषण, लापरवाही और प्राकृतिक आपदाएं इन ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान पहुंचा रही हैं। कई बार लोग घूमने जाते हैं और दीवारों पर अपना नाम लिख देते हैं या कूड़ा-कचरा फैला देते हैं, जिससे इन जगहों की सुंदरता और महत्व दोनों कम हो जाते हैं। यह छोटी-छोटी लापरवाहियां हमारी बड़ी धरोहर को नुकसान पहुंचाती हैं।

विश्व विरासत दिवस हमें यह समझाने का काम करता है कि इन धरोहरों को बचाना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हम सभी की है। अगर हम सच में अपनी संस्कृति से प्यार करते हैं, तो हमें इन स्थलों की देखभाल करनी होगी। ऐतिहासिक जगहों पर साफ-सफाई रखना, नियमों का पालन करना और दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करना।

हर साल इस दिन को एक खास थीम के साथ मनाया जाता है। 2026 की थीम है "संघर्षों और आपदाओं के संदर्भ में जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया।" इसका सीधा सा मतलब है कि जब कोई संकट आता है जैसे युद्ध या प्राकृतिक आपदा, तो हमारी धरोहरों को कैसे सुरक्षित रखा जाए। यह थीम हमें पहले से तैयार रहने और सही समय पर सही कदम उठाने के बारे में बताती है।

स्कूलों, कॉलेजों और कई संस्थानों में इस दिन पर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। जैसे निबंध लेखन, भाषण प्रतियोगिता, प्रदर्शनी और जागरूकता अभियान। इन कार्यक्रमों के जरिए बच्चों और युवाओं को अपनी विरासत के महत्व के बारे में बताया जाता है ताकि वे भविष्य में इन्हें बचाने में अपनी भूमिका निभा सकें।