भोपाल। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित पत्र ने एक बार फिर सियासी घमासान मचा दिया है। इस पत्र को शेयर करने के आरोप में मध्य प्रदेश कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को भोपाल साइबर पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह मात्र एक वायरल पोस्ट था या उसमें कुछ ऐसा छिपा था जिसे दबाने की कोशिश की जा रही है?

कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने फेसबुक पोस्ट और भास्कर को दिए बयान में बताया कि पुलिस ने शुरू में सात आईटी सेल कार्यकर्ताओं को उठाया था, जिनमें से चार को बाद में छोड़ दिया गया। बाकी तीन कार्यकर्ताओं को पिछले 27 घंटों से बिना किसी ठोस वजह के हिरासत में रखा गया है। तन्खा ने चेतावनी दी कि अगर उन्हें तुरंत रिहा नहीं किया गया तो उनकी लीगल टीम दोपहर 1:30 बजे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर देगी। उन्होंने मुख्यमंत्री और डीजीपी को टैग करते हुए कहा कि एमपी पुलिस की इस कार्रवाई से उन्हें गहरी निराशा हुई है।

विवाद का केंद्र है वह पत्र जो 15-16 अप्रैल से सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा था। इसमें वसुंधरा राजे को कथित तौर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को लिखते दिखाया गया था। पत्र में महिला आरक्षण अधिनियम को परिसीमन से जोड़ने पर सवाल उठाए गए थे, पार्टी की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की गई थी और इसे सत्ता-लोभ तथा राजनीतिक बदनियत से जोड़ा गया था। कांग्रेस ने इसे बड़े स्तर पर शेयर किया और कहा कि इससे भाजपा के अंदरूनी षड्यंत्र का खुलासा हुआ है।

18 अप्रैल को शाम करीब 8 बजे वसुंधरा राजे ने खुद इस पत्र को फर्जी बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने लिखा, “सांच को आंच की जरूरत नहीं। यह शुभचिंतकों की कारगुजारी मात्र है।” राजे ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी देने के प्रयास का हर महिला स्वागत कर रही है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध करने वाले चौथी बार भी विपक्ष में ही रहने की तैयारी कर चुके हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बारोलिया ने पत्र को शेयर करते हुए सवाल किया कि जब लाखों लोगों ने इसे देखा और फैलाया तो कार्रवाई केवल चुनिंदा आईटी सेल कार्यकर्ताओं पर ही क्यों? उन्होंने कहा, “अगर पत्र गलत है तो सब पर एफआईआर दर्ज करो, अगर सही है तो सच्चाई दबाना बंद करो।” एमपी कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने भी इसे अवैध हिरासत बताया और कार्यकर्ताओं की तुरंत रिहाई की मांग की।

मामला अब कानूनी लड़ाई की ओर बढ़ता दिख रहा है। एक तरफ कांग्रेस असहमति की आवाज को दबाने का आरोप लगा रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा इसे फर्जी पत्र की साजिश बता रही है। क्या यह वायरल पोस्ट सिर्फ राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिश थी या उसमें कुछ ऐसा था जो सत्ता को असहज कर रहा था? फिलहाल तीन कार्यकर्ता हिरासत में हैं और हाईकोर्ट का रुख होने वाला है। सच्चाई क्या है, यह जल्द ही सामने आ सकता है।