छतरपुर,शिवम सोनी। रविवार की वह सुबह हरपालपुर के वार्ड नंबर 11 में अन्य दिनों की तरह ही शांत और खुशनुमा थी। सूरज की नर्म धूप आंगन में उतर रही थी और घरों में नाश्ते की तैयारी चल रही थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि कालका मैरिज हाउस के पीछे वाले उस मोहल्ले में चंद मिनटों बाद चीख-पुकार मचने वाली है।


सुबह के करीब 10 बज रहे थे। 16 वर्षीय शब्बीर खान और उसका बड़ा भाई 18 वर्षीय साहिल खान हंसी-मजाक करते हुए अपने मकान की छत पर गए थे। ताजी हवा और खुले आसमान के नीचे खड़े इन दोनों भाइयों के ऊपर से मौत का एक अदृश्य जाल बिछा था—11 हजार केवी की हाईटेंशन लाइन। अचानक एक तेज गूंज हुई, नीली चिंगारी चमकी और पलक झपकते ही दोनों भाई उस जानलेवा करंट की चपेट में आ गए। 11 हजार वोल्ट के उस जोरदार झटके ने दोनों को बुरी तरह झुलसा दिया। जो छत चंद लम्हों पहले सुकून का ठिकाना थी, वह देखते ही देखते खून और झुलसे हुए बदन की तड़प का गवाह बन गई।


धमाके की आवाज सुनते ही मोहल्ले में सन्नाटा पसर गया, जो तुरंत ही चीख-पुकार में बदल गया। परिजन बदहवास होकर छत की ओर भागे, जहां शब्बीर और साहिल अचेत पड़े थे। आनन-फानन में दोनों को निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन जख्म इतने गहरे थे कि डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें तुरंत झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। अस्पताल के गलियारों में परिजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे, वहीं दोनों भाइयों की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।


सिस्टम पर सवाल: "कब तक बलि चढ़ेंगे मासूम?"

इस हादसे ने बिजली विभाग के दावों और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मोहल्ले वालों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। परिजनों और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि रिहाइशी इलाकों और घरों के ऊपर से गुजरती ये हाईटेंशन लाइनें प्रशासन की लापरवाही का जीता-जागता सबूत हैं।

मोहल्ले के लोगों ने कहा कि - "हमने कई बार शिकायत की कि इन तारों को हटाया जाए, लेकिन विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था। आज दो मासूमों की जिंदगी दांव पर लग गई, अब इसका जिम्मेदार कौन है?"


फिलहाल घटना के बाद क्षेत्र में भारी तनाव और आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों ने मांग की है कि इन मौत के तारों को रिहाइशी इलाकों से तुरंत हटाया जाए और इस घोर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। आज हरपालपुर की उस छत पर सन्नाटा पसरा है, लेकिन हवाओं में एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या शब्बीर और साहिल की तड़प सिस्टम की नींद उड़ा पाएगी?